सीधी बात
मेटरनिटी में 14 दिन बंद रहे मेजर ऑपरेशन, गर्भवती परेशान
जिलाअस्पताल की मेटरनिटी में 14 दिन मेजर ऑपरेशन बंद रहे। जबकि प्रतिदिन दो से तीन केस मेजर ऑपरेशन के आए, लेकिन यहां की इकलौती गायनिक स्पेशलिस्ट को अस्पताल स्टाफ द्वारा परेशान किए जाने के कारण उन्होंने इस काम से हाथ खड़े कर दिए। वे ओपीडी देखने लगीं। जिसके चलते प्रतिदिन दो केस के हिसाब से 28 से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्राइवेट अस्पतालों में मेजर ऑपरेशन कराने पड़े। जिसमें उनका 5.60 लाख रुपए से अधिक बर्बाद हो गया। क्योंकि जिला अस्पताल में ये ऑपरेशन नि:शुल्क होते हैं। जबकि प्राइवेट अस्पताल में प्रति ऑपरेशन 20 हजार रुपए का खर्च आता है।
क्योंबंद कर दिए मेजर ऑपरेशन : जिलाअस्पताल के प्रसूति विभाग में सात डाक्टर पदस्थ हैं, जिनमें से गायनिक स्पेशलिस्ट एक मात्र डा.मिथलेश सिंह हैं। बाकी सभी छह डाक्टर एमबीबीएस हैं। ऐसे में मेजर ऑपरेशन केवल डा.सिंह ही करती हैं। सितंबर महीने के प्रारंभ में उनकी साथी डाक्टर्स में से एक ने उनकी बदनामी शुरू कर दी कि वे मेजर ऑपरेशन में पैसे लेती हैं। इससे परेशान होकर डा.सिंह ने दो सितंबर के बाद 16 सितंबर तक एक भी मेजर ऑपरेशन नहीं किया। बल्कि वे भी अन्य लेडी डाक्टर्स की तरह ओपीडी में ही सेवाएं देने लगीं।
क्या कैसे नुकसान हुआ
>30 के करीब गर्भवती महिलाओं की रोजाना डिलेवरी होती है जिला अस्पताल में।
> 02 से 03 गर्भवती महिलाएं प्रतिदिन ऐसी होती हैं, जिनके मेजर ऑपरेशन की जरूरत होती है।
> 20 हजार रुपए प्राइवेट अस्पताल में खर्च होते हैं मेजर ऑपरेशन के, जबकि सरकारी अस्पताल में यह नि:शुल्क होते हैं।
> 14 दिन में 28 से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्राइवेट नर्सिंग होम्स पर मेजर ऑपरेशन कराना पड़े।
14 दिन कोई ऑपरेशन नहीं किया
^मेटरनिटी के स्टाफ में से ही एक ने हमारी बदनामी करना शुरू कर दी कि हम मेजर ऑपरेशन के पैसे लेते हैं। जबकि हम आठ महीने में 113 सफल मेजर ऑपरेशन कर चुके हैं, लेकिन कभी कोई एक पैसे की बात नहीं है। इसलिए हमने 14 दिन कोई ऑपरेशन नहीं किया। डा.मिथलेशसिंह, गायनिकस्पेशलिस्ट जिला अस्पताल मुरैना
जिला अस्पताल की मेटरनिटी, जहां 14 दिन बंद रहे मेजर ऑपरेशन।
डाॅ.सियाराम शर्मा, सिविलसर्जन, मुरैना
चार्ज लिए सिर्फ एक सप्ताह हुआ
{ जिलाअस्पताल की मेटरनिटी में 14 दिन मेजर ऑपरेशन बंद रहे हैं