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रेलवे अफसर जिला प्रशासन को नहीं जनता की तकलीफ से मतलब
नएगुड्स प्लेटफार्म के लिए एप्रोच रोड बनाने का मुद्दा रेलवे जिला प्रशासन के बीच दो साल से लटका पड़ा है। इसके चलते शहर के लोगों को एमएस रोड पर भारी वाहनों की आवाजाही से परेशानी हो रही है लेकिन रेलवे से लेकर प्रशासन के अफसरों को जनता की तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है।
एमएस रोड शहर के लोगों के आवागमन के लिए सुरक्षित नहीं है। इस रोड से दोनों ओर मार्केट, स्कूल अस्पताल संचालित हैं। इसलिए सबह से लेकर रात तक लोगों की आवाजाही इस सड़क पर रहती है। एमएस रोड पर भारी लोडिंग वाहनों के संचालित होने से आए दिन दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं। तीन लोगों की ट्रकों की चपेट में आकर मौत भी हो चुकी है। बावजूद इसके जिला प्रशासन नए मालगोदाम की एप्रोच रोड बनाने के मुद्दे पर गंभीर नही है। इस संबंध में मुरैना डिप्टी कलेक्टर सीएमओ रूपेश उपाध्याय का कहना है कि नए मालगोदाम की एप्रोच रोड की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त करने के लिए नगर पालिका के अधिकारी बुधवार को भोपाल जा रहे हैं। वहीं आयुक्त नगरीय प्रशासन से भी चर्चा करेंगे।
जिम्मेदारी से बच रहे अफसर
नएमालगोदाम के लिए एप्रोच रोड बनवाने के सवाल पर कार्रवाई की जिम्मेदार से रेलवे के अफसर बच रहे हैं। उत्तर-मध्य रेलवे के जनरल मैनेजर महेश मंगल के मुरैना प्रवास के दौरान डीआरएम नवीन चौपड़ा ने नए गुड्स प्लेटफार्म की सड़क निर्माण के लिए कलेक्टर से मिलने की बात कही थी लेकिन 15 दिन बीतने के बाद भी रेलवे के किसी प्रतिनिधिमंडल ने उस दिशा में कलेक्टर से मुलाकात नहीं की है।
मालगोदाम के लिये एप्रोच रोड का काम शुरू नहीं हुआ।