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मुरैना से अलग नहीं हुआ सहकारी बैंक, किसानों को कर्ज मिल रहा खाद

7 वर्ष पहले
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पिछले वर्ष किसानों को 112 करोड़ रुपए बांटे थे, इस साल 50 करोड़ भी नहीं बांटे।

भास्करसंवाददाता| श्योपुर

श्योपुरका सहकारी बैंक मुरैना से अलग नहीं किए जाने के कारण जिले के हजारों किसानों को परेशानी हो रही है। अपेक्स बैंक और मुरैना स्थित सहकारी बैंक का पूरा दारोमदार मुरैना जिले पर है। यही वजह है कि इस साल जिले के किसानों को तो पर्याप्त नकद पैसा मिल सका है और ही खाद। सहकारी संस्थाओं को अपेक्स बैंक से पैसा बांटने की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण किसानों की जेब खाली है। कलेक्टर धनंजय सिंह भदौरिया ने इस मुद्दे पर जिले का पक्ष मुरैना में संभागायुक्त शिवानंद दुबे की बैठक में भी उठाया है। लेकिन अब तक इस मामले में कोई हल नहीं निकल सका है।

प्रशासनिक स्तर पर किए जा रहे हैं प्रयास

^इसबार अपेक्स बैंक ने सहकारी संस्थाओं को कम राशि आहरण की अनुमति दी है। इसलिए गत वर्ष की तुलना में आधा पैसा भी केसीसी धारकों को नहीं बांटा जा सका है। इस सिलसिले में कलेक्टर ने प्रयास किए हैं। मुरैना के बैंक अफसर भी प्रयासरत हैं। रामवीरसिंह भदौरिया, नोडलऑफिसर जिला सहकारी बैंक श्योपुर

जल्दही किसानों को मिलेगी राहत

^हमनेसंभाग आयुक्त के समक्ष श्योपुर जिले के किसानों को लोन और खाद मुहैया कराने का मुद्दा उठाया था। सहकारी बैंक मुरैना के सीईओ ने इस बारे में अपेक्स बैंक में बात भी की है। जल्द ही किसानों को राहत मिलने की संभावना है। धनंजयसिंह भदौरिया, कलेक्टर,श्योपुर

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा श्योपुर (फाइल फोटो।)

700 नए केसीसी जोड़े पर नहीं मिला पैसा

जिलासहकारी बैंक ने जिले भर की सोसाइटी के अधीन करीब 700 नए किसान क्रेडिट कार्ड भी इस साल बनाए हैं। लेकिन इन नए केसीसी खाताधारकों को पैसा नहीं दिया जा रहा है। इन्हें जोड़कर जिले में सहकारी बैंक के करीब 58 हजार सदस्य हो चुके हैं। इन सभी को लोन बांटने के लिए करीब 120 करोड़ रुपए चाहिए।