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प्रदेश सरकार खाद निर्माता कंपनियों की मिलीभगत से उपजा यूरिया संकट: कांग्रेस
यूरिया लेने आए किसानों पर पुलिस ने पोरसा में बरसाईं लाठियां, सबलगढ़-अंबाह में भी मारामारी
भास्कर संवाददाता|पोरसा/सबलगढ़/अंबाह
यूरियाकी सप्लाई के मामले में भोपाल के अलावा ग्वालियर से भी मुरैना के साथ भेदभाव हो रहा है। गुरुवार को 800 मी.टन के आबंटन आदेश के बाद मुरैना को सिर्फ 400 मीट्रिक टन यूरिया ही मिला है। आबंटन में से पक्षपात के चलते किसानों को यूरिया नहीं मिल पा रहा है।
शुक्रवार को पोरसा में खाद की पर्चियां लेने आए किसानों पर सिपाहियों ने डंडे चलाए जिससे कुछ किसानों को हल्की चोट आई है। यूरिया खाद के लिए किसान सुबह से ही थाना परिसर में बैठे थे लेकिन खाद की कमी के कारण किसानों को पर्चियां कम-कम बांटी जा रही थीं। इससे किसान खाद के लिए विचलित नजर आए। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी भानुप्रताप घुरैया ने बताया कि शुक्रवार को बांटने के लिए 1800 कट्टे यूरिया खाद उपलब्ध है जबकि किसानों की संख्या दो हजार से ज्यादा है। इस हाल में सभी किसानों को यूरिया प्रदाय नहीं किया जा सकता है। किसान यूरिया के लिए शाम तक कतार में लगे रहे लेकिन कई किसानों को यूरिया नहीं मिल सका
सबलगढ़में एक किमी. लंबी कतार : यूरियाखाद के लिए सबलगढ़ में शुक्रवार को एक किमी. लंबी कतार देखी गई। खाद लेने आए किसान, बच्चे महिलाएं थाने से लेकर चुंगीनाका तक दोहरी लाइन मेें बैठाए गए थे। यूरिया का स्टॉक कम होने के कारण 200 से ’ज्यादा किसान दिनभर की मशक्कत के बाद बिना खाद लिए गांव को लौट गए। यूरिया लेने के फेर में किसानों, महिलाओं बच्चों ने दिनभर कुछ नहीं खाया। किसानों को पीने के लिए पानी तक नसीब नहीं हुआ। लाइन में लगे किसानों को चिंता थी कि कहीं उनका नंबर कट जाए।
अंबाह में खाद के लिए मारा-मारी
ग्वालियरसे मुरैना जिले के लिए आईपीएल की रैक से खाद कम मिलने के कारण अंबाह में भी शुक्रवार को यूरिया का वितरण सभी किसानों को नहीं हो सका। 150 से ज्यादा किसान यूरिया पाने से वंचित रह गए। इससे किसानों में आक्रोश है।
पोरसा। खाद के लिए थाना परिसर में लाइन लगाकर खड़े किसान। दूसरे चित्र में महिलाएं भी खाद लेने पहुंचीं।
मुरैना। गेहूंसरसों की फसल के लिए प्रदेश की भाजपा सरकार किसानों को समय पर यूरिया खाद उपलब्ध नहीं करा पा रही है। इससे बोवनी प्रभावित है और गेहूं की बढ़वार नहीं हो पा रही है। संकट की घड़ी में कांग्रेस किसानों