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पांच साल में भी नहीं बन पाए तीन छात्रावास एक बालक आश्रम

7 वर्ष पहले
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छात्रावास आश्रम के रिवाइज एस्टीमेट के लिए बजट नहीं मिलने से नए भवन आदिम जाति कल्याण विभाग के हैंडओवर नहीं हो पा रहे हैं।

भास्करसंवाददाता|मुरैना

आदिमजाति कल्याण विभाग द्वारा बनवाए जा रहे तीन छात्रावास एक बालक आश्रम का निर्माण कार्य पांच साल में पूरा नहीं हो सका है। इस हाल में आरक्षित वर्ग के छात्र-छात्राओं को छात्रावास आश्रम में रहने की सुविधा नहीं मिल पा रही है।

शहर के गणेशपुरा में 50 सीटर संभागीय कन्या छात्रावास का निर्माण कार्य वर्ष 2007 से चल रहा है। निर्माण कार्य में बिलंव के कारण 27 लाख रुपए की लागत से बनाए जा रहे छात्रावास की लागत बढ़कर 47 लाख रुपए हो गई। आदिम जाति कल्याण विभाग ने इस छात्रावास निर्माण के लिए 27 लाख रुपए का भुगतान तो निर्माण एजेंसी गृह निर्माण मंडल को कर दिया लेकिन रिवाइज एस्टीमेट के 20 लाख रुपए का भुगतान अब तक नहीं किया है। इसके चलते निर्माणाधीन छात्रावास के सेकंड फ्लोर पर चल रहा काम ढाई साल से बंद पड़ा है। विभाग ने छात्रावास के हैंडओवर होने से पहले ही छात्राओं को ग्राउंड फ्लोर पर शिफ्ट कर दिया है।

प्री-मैट्रिकबालक छात्रावास : पोरसामें प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास बनाने का काम वर्ष 2007 से चल रहा है लेकिन बीते पांच साल में यह छात्रावास बनकर तैयार नहीं हो सका है। इस स्थिति में 27 लाख रुपए व्यय करने के बाद भी पोरसा क्षेत्र के छात्रों को 50 सीटर छात्रावास में रहने की सुविधा नहीं मिल पा रही है। छात्रावास को कंपलीट करने के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग ने ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग को मार्च 14 में रिवाइज एस्टीमेट 19.12 लाख रुपए का पेमेंट कर दिया लेकिन ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग ने ठेकेदार से शेष निर्माण कार्य चार महीने बाद भी शुरू नहीं कराया है।

नूराबादका छात्रावास : नूराबादमें वर्ष 2006 से प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास का निर्माण कार्य 43 लाख रुपए की लागत से कराया जा रहा है। बीते आठ साल में यह छात्रावास बनकर तैयार नहीं हो सका है। आदिम जाति कल्याण विभाग के अफसरों ने हाउसिंग बोर्ड के सहायक यंत्री कौशलेन्द्र चतुर्वेदी से छात्रावास को कंपलीट कराने के लिए कई बार कहा है लेकिन बोर्ड ने ठेकेदार को निर्माण कार्य के लिए साइट पर नहीं भेजा है।