वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी...
बड़ी आरजू थी मुलाकात की कार्यक्रम में मंत्रमुग्ध हुए श्रोता, देर रात तक लिया कार्यक्रम का लुत्फ।
भास्करसंवाददाता| मुरैना
वोकागज की कश्ती वो बारिश का पानी...। स्वर्गीय जगजीत सिंह द्वारा गायी गई पंजाब के गीतकार सुदर्शन फाकिर की यह नज्म जब बुधवार की रात मेला रंगमंच से अब्दुल सलीम खान ने गायी तो स्टेडियम के पांडाल में बैठे श्रोता अपनी तालियां रोक सके। फिर तो ऐसा समां बंधा कि लोग देर रात तक बैठकर बड़ी आरजू थी मुलाकात की कार्यक्रम को मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे।
पशुपतिनाथ महादेव मेला में आयोजित हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रंखला में गीत-गजलों की शाम का लुत्फ उठाने श्रोता समय पर अपना-अपना स्थान सुरक्षित कर चुके थे। मंच पर सलीम एंड ब्रदर्स की प्रस्तुति बड़ी आरजू थी मुलाकात की, गजल से शुरू हुई। कार्यक्रम का संचालन डा.रामकुमार सिंह कर रहे थे, जिन्होंने पहले गजल, फिर ठुमरी, और फिर गीतों की महफिल श्रोताओं की मांग पर तरह-तरह से आयोजित कराई। गजलों की फेहरिस्त में गायक जमील खान जफर खान ने भी बराबर का साथ दिया। लाेगाें ने भी तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।
पिया मोसे बोले ना...
अब्दुलसलीम खान ने जब पिया मोसे बोले ना, ठुमरी गाना शुरू की तो तालियों की गड़गड़ाहट से पांडाल गूंज गया। कारण था कि सर्द रात में ठुमरी की यह पेशकश श्रोताओं ने ही की थी। तब सलीम एंड ब्रदर्स ने इस प्रस्तुति को विभिन्न वाद्य यंत्रों से ऐसा सजाया कि हर कोई कह उठा- वाह वाह। कार्यक्रम में मुख्य नगरपालिका अधिकारी डिप्टी कलेक्टर रूपेश उपाध्याय सप|ीक आए थे। साथ ही शासकीय लॉ कॉलेज के प्रिंसिपल विनोद कांकर भी सप|ीक श्रोता दीर्घा में बैठे थे। नगरपालिका के अध्यक्ष राजेश कथूरिया समेत नपा के कार्यपालन यंत्री केके शर्मा, असिस्टेंट इंजीनियर केके शर्मा समेत शहर के गणमान्य लोग देर रात तक कार्यक्रम में मौजूद रहे।
मुरैना। कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार उपस्थित अतिथि श्रोता।