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ओपीडी में रोज रहे 200 मरीज, इलाज के लिए सिर्फ एक डाॅक्टर

6 वर्ष पहले
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{मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं मरीज

{ पीएमटी फर्जीवाड़े में फंसे डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद गहराया संकट

भास्करसंवाददाता|पोरसा

सामुदायिकस्वास्थ्य केन्द्र की ओपीडी में प्रतिदिन 200 मरीज रहे हैं। मरीजों का चेकअप कर इलाज प्रदान करने के लिए सिर्फ एक डाक्टर उपलब्ध है। डाक्टरों की कमी के चलते अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हैं। दूसरे डाक्टर की पदस्थगी पर स्वास्थ्य आयुक्त गंभीर नही हैं।

पोरसा अस्पताल में इन दिनों बीएमओ डाॅ. एसएन मेवाफरोश ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं। सुबह शाम की ओपीडी में डेढ़ सौ से दो सौ मरीजों का चेकअप एक डाक्टर के जिम्मे होने से सीबियर क्रॉनिक बीमारी के मरीजों का चेकअप ठीक से नहीं हो पा रहा है। इस सीएससी पर पदस्थ डा. विनोद शाक्य को पीएमटी फर्जीवाड़े के कारण स्पेशल टास्क फोर्स की टीम 18 जुलाई को पकड़कर ले गई तब से अस्पताल को कोई दूसरा डाक्टर नहीं मिला है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के इकलौते डाॅक्टर मेवाफरोश को ओपीडी के अलावा पुलिस द्वारा लाए जाने वाले मजरहों की एमएलसी करना पड़ती है। साथ ही मृतक व्यक्तियों का पोस्टमार्टम भी उन्हीं को करना है। इसके अलावा कोर्ट पेशी भी डाॅक्टर के जिम्मे हैं। राष्ट्रीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए आयोजित विभागीय प्रशासनिक बैठकों में बीएमओ हाजिरी देना पड़ती है। इसके बाद एक डाॅक्टर पर 200 मरीजों के इलाज के लिए कितना समय बचेगा इस पर स्वास्थ्य प्रशासन का ध्यान नहीं है। इधर मरीजों की परेशानी को भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

सीएससी पर नहीं एक भी विशेषज्ञ

सामुदायिकस्वास्थ्य केन्द्र पर स्त्री रोग, अस्थि रोग, शिशु रोग, नाक-कान-गला रोग सहित मेडिसिन विशेषज्ञ पदस्थ होना चाहिए लेकिन यहां एक भी स्पेशलिस्ट डाक्टर पदस्थ नहीं है। 60 ग्राम पंचायतों के मरीज बेहतर इलाज के लिए आगरा, ग्वालियर मुरैना जाने को मजबूर हैं। हार्टअटैक जैसी तकलीफ के मरीज को पोरसा से मुरैना रैफर करने की दशा में उसे सवा घंटे बाद ही इलाज मिल पाता है। अस्पताल में चिकित्सा सेवाएं बेहतर करने पर जनप्रतिनिधियों का ध्यान नहीं है।

स्त्रीरोग विशेषज्ञ नहीं

पोरसामें सीएससी होने के बाद भी डेढ़ साल से कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ पदस्थ नहीं है। पूर्व पदस्थ डा. शिल्पी गुप्ता के नौकरी छोड़ देने के बाद से अब तक यहां लेडी डाक्टर की पदस्थापना नहीं हुई है। तीन लाख की आबादी के बीच से आने वाली प्रसूताओं के प्रसव कराने के लिए नर्सेस को ही सेवाएं देना पड़ रही हैं। जटिल प्रसव की दशा में प्रसूता को मुरैना जिला अस्पताल रैफर करना पड़ता है।

दिनभर लगी रहती है लाइन

^पोरसाअस्पताल की ओपीडी में तीन दिन से बुखार का इलाज कराने जा रहा हूं लेकिन डॉक्टर के चेंबर के बाहर भीड़ अधिक रहती है।\\\'\\\' रामबरनसिंह तोमर, पोरसा

डॉक्टरों की मांग की है

^पोरसाअस्पताल के लिए डाक्टर्स के तीन पद स्वीकृत हैं। इनमें बीएमओ के अलावा गायनिक आर्थाेपेडिक स्पेशलिस्ट के पद मंजूर हैं लेकिन दो स्पेशलिस्ट पदस्थ ही नही हैं।\\\'\\\' डा.एसएन मेवाफरोश, बीएमओ पोरसा