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हाईस्कूल नहीं होने से छोड़ देते पढ़ाई

7 वर्ष पहले
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मध्यप्रदेशऔर महाराष्ट्र की सीमा से सटे आदिवासी बाहुल्य गांव सालबर्डी दाबका पंचायत के 13 गांव के छात्र-छात्राओं को हाईस्कूल की पढ़ाई करने के लिए 70 किमी की दूरी तय करना पड़ता है। इन पंचायत के आसपास हाईस्कूल नहीं होने से अधिकांश छात्र छात्राएं आठवीं कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। सालबर्डी दाबका पंचायत के तहत कुमुदरा, जोगीखेड़ा, रोहना, अड़ामपानी, पचउमरी, घोरपेंड, अमराई, सोनमऊ, झुनकारी, कुंड सहित एक दर्जन गांव आते हैं। इन गांवों में केवल मिडिल स्कूल हैं। इसके बाद पढ़ाई करने के लिए छात्र-छात्राओं को 70 किमी का सफर तय करके प्रभातपट्टन आना पड़ता है। विडंबना यह है कि आजादी के इतने साल बाद भी यहां पर हाईस्कूल खोलने की पहल शासन द्वारा नहीं की गई। सालबर्डी पंचायत की सरपंच उषा मढ़ीकर ने बताया कि 26 जनवरी 2011 को ग्रामसभा में हाईस्कूल खोलने के लिए प्रस्ताव पारित कर जिप भिजवाया।

प्रयास किए जाएंगे

^यहसही है कि सालबर्डी दाबका ग्राम पंचायत में हाईस्कूल नहीं होने से वहां के छात्रों को 70 किमी दूर प्रभातपट्टन आना पड़ता है। उस आदिवासी क्षेत्र में हाईस्कूल खोलने के लिए पूरे प्रयास किए जाएंगे।^ -चंद्रशेखर देशमुख, विधायकमुलताई

क्या कहते हैं छात्र

सालबर्डीगांव के अरविंद खातरकर और ईश्वर नांदगांवकर प्रभातपट्टन के एक्सीलेंस स्कूल में कक्षा 12वीं की पढ़ाई कर रहे हैं। इन छात्रों का कहना है कि गांव में हाईस्कूल नहीं होने से ब्लॉक मुख्यालय पर आना पड़ता है। अगर हमारे गांव में स्कूल खुल जाए तो इतना लंबा फेरा नहीं लगाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि पढ़ाई में रुचि रखने वाले कई छात्र छात्राएं छात्रावास में भी रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।

प्रतिवेदन दिया है

^सालबर्डी,दाबका गांव में हाईस्कूल खोलने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को प्रतिवेदन भेज दिया गया है।^ -सुभाषबोड़खे, बीईओप्रभातपट्टन

किराए के मकान में रहकर करते हैं पढ़ाई

सालबर्डीगांव के सुखदेव मढ़ीकर, राजू मानकर, निलेश भूमरकर, रोशन लोखंडे, घोरपेंड के गुलाबराव इवने, बलीराम उइके, पचमऊ के श्यामलाल परते ने बताया कि इन गांवों में आठवीं तक स्कूल है। पढ़ाई के लिए 70 किमी दूर जाना पड़ता है। यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने से पालक बच्चों को पढ़ाई के लिए इतनी दूर नहीं भिजवाते हैं। छात्रों को आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ना पड़ता है। दाबक