25 दिन में लौटी ताप्ती दर्शन यात्रा
ताप्तीनदी से 25 दिन पहले निकली ताप्ती दर्शन पद यात्रा का पतासा (गुजरात ) में समापन हुआ। रविवार को पदयात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने नगरवासियों को ताप्ती तट पर स्थित प्राचीन मंदिरों के महत्व की जानकारी दी। इसके साथ ही पदयात्रियों ने लोगों से ताप्ती को साफ रखने में सहयोग मांगा। नगर से 15 जनवरी को धूमधाम से ताप्ती दर्शन पद यात्रा शुरू हुई थी।
यात्रा का उद्देश्य जन-जन तक ताप्ती के महत्व को पहुंचाना था। 25 दिनों में यात्रा 683 किमी का सफर तय कर पतासा पहुंची थी। पदयात्रियों ने मां ताप्ती का पूजन कर यात्रा का समापन किया। यात्रा में गए राजू पाटनकर, तुकाराम कडुकर, सुरेंद्र देशमुख, किशोर पारखे, अजय गावंड़े, दिलीप देशमुख ने बताया कि ताप्ती नदी के किनारे अनेक महत्वपूर्ण स्थान है।
प्रचार प्रसार के अभाव में लोग इनके महत्व से अंजान है। कई स्थानों पर ताप्ती नदी में गंदगी फैली हुई है। जिसे दूर करने के लिए जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है। राजू पाटनकर ने बताया कि ताप्ती नदी के किनारे स्थित गांवों में मां ताप्ती के महत्व की जानकारी दी गई। श्री पाटनकर ने बताया कि पहली बार यात्रा ने इतना लंबा सफर तय किया है। इसके पहले ताप्ती दर्शन यात्रा 523 किमी की सफर तय कर नीमगवान (महाराष्ट्र) तक पहुंची थी। पदयात्रियों ने उद्गम स्थल से ही ताप्ती नदी को साफ और प्रदूषण से बचाने की आवश्यकता बताई।
मुलताई। ताप्ती दर्शन यात्रा के समापन पर यात्री वापस लौटे।
आस्था-श्रद्धा