पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • सोयाबीन की फसल पर लगा रायजोक्टोनिया, छोटे हो गए दाने

सोयाबीन की फसल पर लगा रायजोक्टोनिया, छोटे हो गए दाने

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
किसान बोलें- खराब फसल का मुआवजा दो, देहगुड़ बांध बनाओ

^रायजोक्टोनियासे सोयाबीन को बचाने के लिए कुछ नहीं किया जा सकता। केवल ट्राइकोडर्मा का छिड़काव कर उसे आगे फैलने से रोका जा सकता है।^ -एकेराठौर, कृषिविकास अधिकारी घोड़ाडोंगरी

पांच एकड़ की फसल सूखी

जुआड़ीगांव के लखन यादव, दिलीप यादव, धनराज यादव, विक्रांत मेहतो सहित अन्य किसानों की फसल पर यह रोग लगा है। इससे लखन यादव की पांच एकड़ की फसल खड़ी सूख गई है। लखन यादव के अनुसार रोग से सोयाबीन की फसल पर लगी फल्लियां सूख गई है और दाने की छोटे हो गए है। उन्होंने बताया कि एक दर्जन किसानों के खेतों पर रायजोक्टोनिया के लक्षण दिखाई देने लगे हैं।

मुलताई। गुरुवार को देहगुड़ के ग्रामीण विधायक को समस्या बताते हुए।

नगर संवाददाता|मुलताई

अभीतक बारिश से खराब हुई फसलों का मुआवजा हमें नहीं मिला है। पिछले दो सालों से देहगुड़ जलाशय का काम शुरू नहीं हुआ है। अब आप ही कुछ करो जिससे हम किसानों की समस्या दूर हो सके। यह बात गुरुवार को देहगुड़ के किसानों ने विधायक चंद्रशेखर देशमुख से कही। देहगुड़ के विष्णु नागले, बुधवराव देशमुख सहित अन्य किसान अपनी समस्याओं को लेकर विधायक के पास पहुंचे। किसानों ने कहा कि पिछले दो साल से फसलों पर प्रकृति की मार पड़ रही है। इस साल लगातार बारिश से सोयाबीन की फसल खराब हो गई है। दो साल से देहगुड़ जलाशय का काम शुरू नहीं हुआ है। जलाशय बनने के बाद देहगुड़ सहित आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों के किसानों को इसका लाभ मिलेगा। कुछ किसान जानबूझकर जलाशय का काम शुरू नहीं होने दे रहे हैं। बार-बार जलाशय निर्माण की समय सीमा बढ़ाई जा रही है। इसके बाद भी अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। काम शुरू नहीं होने देने वाले किसानों की समस्या का समाधान कर निर्माण कार्य शुरू किया जाना चाहिए।

रानीपुर| घोड़ाडोंगरीब्लॉक में सोयाबीन फसल पर रायजोक्टोनिया रोग का संकट गया है। इस रोग से जुआड़ी के एक किसान की पांच एकड़ की फसल बरबाद हो गई है, वहीं अन्य किसानों के खेतों में रोग का प्रभाव शुरू हो गया है। इस रोग से सोयाबीन की फसल में लगी फल्लियां सूख गईं हैं और दाने भी छोटे पड़ने लगे हैं। इधर कोयलारी गांव के किसानों के खेत में भी इस रोग के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। कमजोर मानसून से पहले तो किसानों की फसलें प्रभावित हुई। कुछ किसान खेतों में बोवनी ही नहीं कर पाए।