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4604 लोगों ने आपसी विवाद भुलाकर समझौता किया
लोक अदालत पक्षकारों के बीच आपसी बुराई को सुलह के माध्यम से दूर करने का तरीका है। पक्षकारों को इसकी सार्थकता को समझना चाहिए और अपने प्रकरण आपसी सामंजस्य से निपटाने का प्रयास करना चाहिए। लोक अदालत से पक्षकारों को न्यायालयीन परेशानी के बिना न्याय मिलता है। यह बात जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार दुबे ने शनिवार को नेशनल लोक अदालत के शुभारंभ अवसर पर कही। शनिवार को जिला न्यायालय बैतूल, मुलताई, आमला, भैंसदेही के न्यायालय द्वारा जिले में लंबित सभी प्रकरण के 7636 प्रकरण लोक अदालत में निराकरण के लिए रखे गए थे। इनमें से 4604 नियमित प्रकरणों का निराकरण हुआ।
शनिवार को जिला न्यायालय सहित अन्य जगहों पर नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। 4 हजार 604 प्रकरणों का निराकरण इस दौरान किया गया। इन प्रकरणों में से 265 क्लेम प्रकरण निराकृत किए गए जिनमें 2 करोड़ 57 लाख 52 हजार 200 रुपए की राशि क्षतिपूर्ति के रूप में पक्षकारों को दिए जाने के लिए अवार्ड पारित किया गया। चेक संबंधी 100 प्रकरणों में भी कुल 2 करोड़ 28 लाख 85 हजार 407 रुपए का अवार्ड पारित किया गया। इस प्रकरण नेशनल लोक अदालत में कुल 4 करोड़ 86 लाख 37 हजार 607 रुपए की राशि का अवार्ड पारित किया गया। इससे 10800 लोगों को लाभ हुआ।
पैरों से निशक्त भी पहुंचे मामला सुलझाने
पैरोंसे निशक्त तबरेज वारसे निवासी देसावाड़ी भी अवैध सागौन रखने के एक मामले में सुलह करने पहुंचे। यहां वन अमले ने उनके प्रकरण का निपटारा करने का प्रयास किया।
पहला नोटिस 7045 का दूसरा 9045 का
बरहापुरके रामभाउ महाले को बिजली कंपनी की बकाया के दो नोटिस लेकर पहुंचे। उन्होंने बिजली कंपनी के डीई आरके वर्मा को बताया कि उन्हें पहला नोटिस 7045 रुपए का एवं दूसरा 9045 रुपए के बकाया का मिला है।
मीटर काटने के बाद भी रहा बिल
सारनीनिवासी विक्रम मिस्त्री ने बिजली कंपनी के काउंटर पर पहुंचकर बताया कि दो साल पहले उन्होंने मीटर कटवा दिया था। इसके बावजूद उन्हें 20 हजार 321 रुपए का बिल दिया गया है। इस पर बिजली कंपनी ने दस्तावेज खंगालकर उनकी समस्या दूर करने का प्रयास किया।
14 हजार की जगह ढाई हजार देकर निबटाया मामला
वनविभाग में अवैध लकड़ी तस्करी के मामले बड़ी संख्या में रखे गए थे। मोखा निवासी उमेश विश्वकर्मा पर सितंबर 2011 में अवैध रूप से लकड़ी रखने का प्रकरण बना था। उसे