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किसानों को अधिकारी बता रहे हैं यूरिया का विकल्प

7 वर्ष पहले
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श्रीवानखेड़े ने बताया कि जिन किसानों के पास यूरिया है वह भी फसल में फेंकने की बजाय घोल बनाकर उपयोग कर सकते हैं। 200 लीटर पानी में 4 किलो यूरिया प्रति एकड़ के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव करेंे।

ये तरीके बताए

कृषिविभाग के एसडीओ आरजी वानखेड़े ने बताया कि वर्तमान में यूरिया की कमी है। इस स्थिति में यूरिया की पूर्ति के लिए किसान 19:19:19 का छिड़काव गेहूं की फसल पर कर सकता है। 19:19:19 घुलनशील उर्वरक है। श्री वानखेड़े ने बताया कि स्प्रे टंकी में 100 ग्राम 19:19:19 उर्वरक डालकर छिड़काव करें। एक किलो 19:19:19 एक एकड़ में लगी फसल के लिए पर्याप्त है। कम खर्च पर यूरिया का विकल्प है।

नगर संवाददाता|मुलताई

यूरियाखाद नहीं मिलने से किसान गेहूं के उत्पादन को लेकर चिंतित है। किसानों का कहना है कि यूरिया नहीं मिलने से गेहूं का उत्पादन कम होगा। किसानों की इस समस्या का समाधान अब कृषि विभाग के अधिकारियों ने निकाल लिया है। कृषि विभाग का अमला गांव-गांव पहुंचकर किसानों को यूरिया के स्थान पर 19:19:19 (एनपीके) का उपयोग करने की सलाह दे रहा है। कृषि वैज्ञानिक डॉ.वीके वर्मा और एसडीओ आरजी वानखेड़े ने बताया कि यूरिया नाइट्रोजन की कमी को दूर करता है। नाइट्रोजन, पोटाश और सुपर फाॅस्फेट तीनों होता है। यूरिया से कम लागत में एनपीके बाजार में मिल जाता है। इसके उपयोग से गेहूं के उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी सहित मैदानी अमला गांव-गांव पहुंच रहा है।