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बोरगांव व देवडोंगरी का 22 हेक्टे. में होगा विस्थापन

5 वर्ष पहले
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ताप्ती नदी पर बनने वाले पारसडोह डेम के डूब क्षेत्र में प्रभात पट्टन ब्लॉक का बोरगांव और देवडोंगरी आ रहा है। दोनों गांवों के विस्थापन के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल संसाधन संभाग ने दोनों गांवों के विस्थापन के लिए डीपीआर बनाकर वरिष्ठ कार्यालय को भेज दी है। साथ ही गांवों में आवासीय मकानों के मूल्यांकन के टीम बनाई है। जल संसाधन उपसंभाग के एसडीओ एसके सिरसाम ने बताया दोनों गांवों के विस्थापन पर लगभग 18 करोड़ रुपए खर्च होंगे। बोरगांव के विस्थापन के लिए 14 हेक्टेयर और देवडोंगरी के विस्थापन के लिए साढ़े सात हेक्टेयर निजी जमीन खरीदने का प्रावधान किया है। जमीन खरीदने के बाद डूब क्षेत्र प्रभावित गांव के ग्रामीणों को भूखंड आवंटन किया जाएगा। साथ ही गांव में आवश्यक मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएगी।

अब तक 446 किसानों की जमीन की हुई रजिस्ट्री
तहसीलदार आशीष श्रीवास्तव ने बताया प्रभावित किसानों को परेशानी नहीं हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। 960 किसानों में से 446 किसानों की रजिस्ट्री हो चुकी है। शेष किसानों की रजिस्ट्री का कार्य जारी है। काजली के सभी किसानों की रजिस्ट्री का कार्य हो चुका है। अभी केवल एक सर्विस प्रोवाइडर रजिस्ट्री कर रहा था। जिससे समय लग रहा था। उपपंजीयक और जल संसाधन संभाग के एसडीओ को निर्देश दिए है कि नगर में 24 सर्विस प्रोवाइडर है उनसे भी रजिस्ट्री कराए।

10 गांवों के 960 किसानों की जमीन जा रही डूब में
84 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले पारसडोह डेम निर्माण में 10 गांवों के 960 किसानों की 1095 हेक्टेयर जमीन डूब क्षेत्र में आ रही है। गौला, काजली, नांदकुडी, पचधार, गरव्हा, डोलहन , कुटखेड़ी, बोरगांव, पौनी और देवडोंगरी के किसानों की जमीन डूब में जा रही है। डेम निर्माण के बाद 30 गांवों के किसानों की 9990 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी। इधर, डूब क्षेत्र के किसान तहसील कार्यालय पहुंचकर जमीन की रजिस्ट्री शासन के पक्ष में कर रहे हैं। बुधवार को विधायक चंद्रशेखर देशमुख को तहसील कार्यालय में किसानों ने रजिस्ट्री समय पर नहीं होने की शिकायत की। इस पर विधायक ने तहसीलदार को कहा किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसका विशेष ख्याल रखा जाएं।

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