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अब बिरला मंदिर का आधा हिस्सा शासन के कब्जे में
बंदभारत कॉमर्स उद्योग की संपत्ति बुधवार को सरकारी घोषित होते ही स्थानीय प्रशासन ने गुरुवार सुबह 8 बजे ही विभिन्न स्थानों पर मौजूद उद्योग के कब्जे की समस्त सरकारी जमीनों का कब्जा ले लिया है। तहसीलदार ममता पटेल ने राजस्व निरीक्षक पटवारियों के साथ बिरला मंदिर हवाई पट्टी के अलावा बंद उद्योग का भवन, आवासीय कॉलोनी सहित बिरलाग्राम, मेहतवास पाड़ल्याकलां क्षेत्र में स्थित कुल 193 हैक्टेयर (928 बीघा) जमीन को कब्जे में लिया है। बंद उद्योग के मुख्य द्वार पर तहसीलदार ने संपत्ति के सरकारी होने का नोटिस भी चस्पा किया है। गौरतलब है कि बुधवार को अपर कलेक्टर पवन जैन ने ग्रेसिम क्रांतिकारी यूनियन महामंत्री भवानीसिंह शेखावत की आपत्ति का निराकरण करते हुए बंद उद्योग के स्वामित्व को सरकारी घोषित कर तहसीलदार को कब्जा लेकर पंचनामा रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए थे। जिसका पालन करते हुए तहसीलदार ने बंद उद्योग की संपत्तियों का कब्जा लिया है। शासन की इस कार्रवाई से ग्रेसिम उद्योग प्रबंधन को करारा झटका लगा है। ग्रेसिम ने यह जमीन हाईकोर्ट परिसमापक के माध्यम से हुई नीलामी में 39 करोड़ 9 लाख रुपए में खरीदी थी। उक्त कार्रवाई को ग्रेसिम प्रबंधन ने एकपक्षीय कार्रवाई बताते हुए फैसले के खिलाफ अपील न्यायालय में जाने की बात कही है।
बिरलामंदिर के मुख्य द्वार से फव्वारे तक की जमीन सरकारी- बिरलासमूह द्वारा निर्मित बिरला मंदिर का आधा हिस्सा सरकारी जमीन पर निकला है। मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर निर्मित सड़क फव्वारा, हवाई पट्टी का एक बड़ा हिस्सा भी सरकारी जमीन पर ही चिह्नित हुआ है। तहसीलदार पटेल के अनुसार गुरुवार को बंद उद्योग के मुख्य द्वार पर नोटिस चस्पा कर दिया है। जल्द ही उद्योग के स्वामित्व की समस्त संपत्तियों का सीमांकन कराकर सरकारी जमीनों को चिह्नित भी किया जाएगा।
ग्रेसिमजमीन मुफ्त में लेना चाहता है- शेखावतने उक्त कार्रवाई को षड्यंत्र करार देते हुए ग्रेसिम प्रबंधन पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा ग्रेसिम उक्त जमीन को मुफ्त में लेना चाहता है, क्योंकि बंद उद्योग की संपत्ति कारखाना उपयोग के लिए ही है। ऐसे में जमीन का अन्य उपयोग नहीं हो सकता है। जमीन सरकारी घोषित होने से ग्रेसिम प्रबंधन शासन से उद्योग का विस्तार करने अथवा नया प्लांट स्थापित करने के लिए जमीन को आने वाले दिनों में शासन से मांगेगा। ऐसे में प