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चंबल के पानी को ग्रेसिम ने संरक्षित करना शुरू किया
अल्पवर्षाके कारण क्षेत्र में आगामी दिनों में गहराने वाले जलसंकट से निपटने के लिए ग्रेसिम उद्योग प्रबंधन ने युद्धस्तर पर तैयारी की है।
उद्योग के तकनीकी अधिकारियों के साथ कर्मचारियों का अमला इन दिनों 24 घंटे चंबल की खोह गड्ढों में जमा पानी को संरक्षित करने में लगा हुआ है। प्रबंधन की कोशिश है कि पानी की कमी से उद्योग को जल्द बंद करने की स्थिति बने। क्योंकि इसका सीधा असर श्रमिकों पर रोजगार बंद होने के रूप में गिरता है। वर्तमान में चंबल पर बने डेम में 268 एमसीएफटी पानी जमा है। इसमें 100 एमसीएफटी पानी पेयजल के लिए सुरक्षित रखने के बाद उद्योग के पास 168 एमसीएफटी पानी शेष बचेगा। उद्योग के संचालन में प्रतिदिन डेढ़ एमसीएफटी पानी खर्च होता है। 30 जून तक उद्योग को संचालित करने के लिए 210 एमसीएफटी पानी की आवश्यकता है। हालांकि टकरावदा जलवाल तालाब में उद्योग के रिजर्व है। लेकिन चंबल में जमा पानी से किसान अवैध रूप से सिंचाई कर रहे हैं जो भविष्य में परेशानी खड़ी कर सकता है।
उद्योग में अलर्ट घोषित
ग्रेसिमउद्योग के जनसंपर्क अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया प्रबंधन की सबसे बड़ी प्राथमिकता पेयजल उपलब्ध कराना है। इसके लिए 30 जून तक के लिए 100 एमएसीएफटी पानी सुरक्षित है। इसके अलावा शेष जमा पानी तालाब के रिजर्व वॉटर के सहारे अप्रैल अंत तक उद्योग का संचालन हो इसके लिए जहां भी पानी जमा है उसे सहेजा जा रहा है। ताकि श्रमिकों को कम से कम आर्थिक नुकसान हो। उद्योग में अलर्ट घोषित कर बूंद-बूंद पानी बचाने के निर्देश दिए गए हैं।
नपाभी ध्यान दें
नपाद्वारा शहरभर में 100 से अधिक सरकारी नलकूपों में से आधे से अधिक में बेतहाशा पानी का दोहन हो रहा है। 10 पूर्व नपा सीएमओ राजेंद्र जैन ने इन नलकूपों के संचालन का समय निश्चित करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन अब तक उक्त व्यवस्था शुरू नहीं हुई है। लोग अभी भी सड़कों, घरों के ओटलों वाहनों को धोने में फिजूल में पानी का अपव्यय कर रहे हैं। इस पर रोक लगाना जरूरी है।
उद्योग में अलर्ट घोषित
ग्रेसिमउद्योग के जनसंपर्क अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया प्रबंधन की सबसे बड़ी प्राथमिकता पेयजल उपलब्ध कराना है। इसके लिए 30 जून तक के लिए 100 एमएसीएफटी पानी सुरक्षित है। इसके अलावा शेष जमा पानी तालाब के रिजर्व वॉटर के सहारे अप्रैल अंत तक उद्योग का संचालन हो इसके लिए जहां भी पानी जमा है उसे सहेजा जा रहा है। ताकि श्रमिकों को कम से कम आर्थिक नुकसान हो। उद्योग में अलर्ट घोषित कर बूंद-बूंद पानी बचाने के निर्देश दिए गए हैं।
नपाभी ध्यान दें
नपाद्वारा शहरभर में 100 से अधिक सरकारी नलकूपों में से आधे से अधिक में बेतहाशा पानी का दोहन हो रहा है। 10 पूर्व नपा सीएमओ राजेंद्र जैन ने इन नलकूपों के संचालन का समय निश्चित करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन अब तक उक्त व्यवस्था शुरू नहीं हुई है। लोग अभी भी सड़कों, घरों के ओटलों वाहनों को धोने में फिजूल में पानी का अपव्यय कर रहे हैं। इस पर रोक लगाना जरूरी है।