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6200 की वेतनवृद्धि पर श्रमिकों ने हाथ उठाकर जताया विरोध
श्रमिकअधिकारों पर राजनीतिक दखल ने ग्रेसिम उद्योग के पांच साल के समझौते की राह में फिर रुकावट डालने का प्रयास किया है। गुरुवार शाम शहर कांग्रेस ने उद्योग के पॉवर हाउस गेट पर मीटिंग कर कथित रूप से श्रम संगठनों द्वारा 6200 रुपए की वेतनवृद्धि करने की घोषणा को श्रमिकों का अपमान बताते हुए कहा कि समझौता करने का अधिकार रखने वाले संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा में शामिल पांचों श्रम संगठन श्रमिक हितों की अनदेखी कर प्रबंधन को फायदा पहुंचाने की फिराक में है। श्रमिकों को यह कहकर भरमाया जा रहा है कि अगर कोर्ट में समझौता गया तो श्रमिकों का नुकसान होगा।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुबोध स्वामी ने मीटिंग को संबोधित करते हुए यहां तक कह डाला कि अगर कोर्ट में जाने पर ग्रेसिम प्रबंधन को थोड़ा भी लाभ होता तो वह 2500 रुपए की वेतनवृद्धि के प्रस्ताव का राग अलापने के बाद 6200 रुपए पर नहीं आता। यह तो संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा की ढिलाई है जो 28 हजार रुपए की वेतनवृद्धि की मांग करते-करते 6200 रुपए की वेतनवृद्धि पर सहमति जताने को तैयार है। जबकि प्रबंधन 2500 से शुरू होकर पूर्व समझौते के 4 हजार रुपए की आंकड़े से मात्र 2200 रुपए अधिक देने पर श्रम संगठनों को राजी करने में सफल होता दिखाई दे रहा है। स्वामी ने मीटिंग में 6200 रुपए की वेतनवृद्धि से श्रमिकों का सम्मान अथवा अपमान होने का सवाल भी पूछा। इस पर श्रमिकों ने हाथ उठाकर कहा कि वेतनवृद्धि का उक्त आंकड़ा श्रमिकों का अपमान है।
चुनावहो गए, अब तो वादा निभाएं- मीटिंगमें कांग्रेस ने विधायक दिलीपसिंह शेखावत को चुनौती देते हुए कहा चुनाव के पूर्व मां राम की कसम खाकर श्रमिकों हितों की अनदेखी होने देने का दावा करने वाले अब गेट पर आकर श्रमिकों को उनका हक दिलाए।
हितैषी किसके संगठन
स्वामीने कहा तीन दिन पूर्व गेट मीटिंग में श्रमिक नेता मजदूरों को यह कह गए कि 6200 रुपए की वृद्धि पर राजी नहीं हुए तो मामला कोर्ट में जाएगा। इससे श्रमिकों का नुकसान होगा। यह समझ से परे है कि श्रम संगठन प्रबंधन हितैषी है अथवा प्रबंधन की पैरवी कर रहे है।
गेट मीटिंग के दौरान उपस्थित श्रमिक। इनसेटसंबोधितकरते स्वामी
गेट मीटिंग से स्कूली बच्चों की एक घंटे तक होती रही फजीहत
गेटमीटिंग के दौरान कांग्रेस को राजनीति की फिक्र थी तो श्रमिकों को हक की। लेकिन शाम 5 से 6 बजे तक चली मीटिंग के द