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श्रम संगठनों की प्रबंधन के साथ बैठक भी विफल

7 वर्ष पहले
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श्रमिक हितों को देने में आनाकानी कर रहे ग्रेसिम प्रबंधन के खिलाफ श्रमिकों में आक्रोश गहरा होता जा रहा है। शनिवार को भी प्रबंधन संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा के बीच हुई बैठक विफल रही। मोर्चा प्रवक्ता लल्लन प्रसाद के अनुसार सुबह आयोजित बैठक में भी प्रबंधन ने नकारात्मक रूख दिखाया है। प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ मोर्चा ने मंगलवार से आंदोलन करने की रणनीति तय की है। दूसरी ओर समझौता लंबित करने के विरोध में शनिवार शाम उद्योग में कार्यरत श्रमिकों ने पांचों श्रम संगठनों के कार्यालय पर जाकर प्रदर्शन किया। श्रमिकों का कहना था कि समझौता बैठक उज्जैन की बजाए नागदा में आयोजित की जाना चाहिए। सहायक श्रमायुक्त के साथ त्रिपक्षीय बैठक में 4 घंटे तक क्या हुआ, इसकी सही जानकारी श्रमिकों को नहीं दी जाती है। ऐसे में समझौता बैठकों में मीडिया को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए, ताकि श्रमिकों को सही जानकारी मिल सके।

इसलिएगुस्से में श्रमिक- श्रमिकोंका कहना था कि मात्र 15 दिन पूर्व प्रबंधन ने पूरक मांग पत्र के माध्यम से 396 श्रमिकों के पद समाप्त करने का हवाला देकर समझौते में इस मांग पर भी चर्चा का प्रस्ताव दिया था। जबकि ऑटोमाइजेशन के नाम पर श्रमिकों की पदस्थापना खत्म होने में 5 से 7 वर्ष का समय लगना है। ऐसे में आगामी समझौते में इस प्रस्ताव को लाया जाना था। कायदे से संयुक्त मोर्चा को पूरक मांग पत्र स्वीकार ही नहीं करना था। दबाव में मांग पत्र स्वीकार करने का परिणाम यह निकला कि शुक्रवार को सहायक श्रमायुक्त के साथ बैठक इसी एक मुद्दे को हल करने में निपट गई। जबकि बैठक समझौते के उन बिंदुओं का निराकरण करने के लिए बुलाई गई थी, जिन पर दोनों पक्षों के बीच गतिरोध है।

गेटमीटिंग से होगी शुरुआत- मोर्चाप्रवक्ता के अनुसार प्रबंधन जानबूझकर समझौता अटका रहा है। मजबूरन अब मोर्चा मंगलवार से गेट मीटिंग की शुरुआत करेगा। मीटिंग में श्रमिकों की जो राय होगी। उसके अनुरूप आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। श्रमिक चाहेंगे तो हड़ताल करने जैसा निर्णय लेने से भी मोर्चा पीछे नहीं हटेगा।

बीएमएस कार्यालय पर श्रमिक नेता जोधसिंह से चर्चा करते श्रमिक।