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परेशान होकर आखिर महिला डॉक्टर ने इस्तीफा दिया
अस्पताल में आए दिन हंगामे से परेशान होकर डॉ. अंकिता मेहता ने शनिवार को पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे ने अस्पताल प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी है। कारण डॉ. मेहता स्त्री रोग विशेषज्ञ होने के साथ सर्जन भी थीं। उनके इस्तीफा का खामियाजा अस्पताल में आने वाली महिला मरीजों प्रसूताओं को भुगतना पड़ेगा। क्योंकि महिला डॉक्टर के अभाव में अब उन्हें रैफर करने के अलावा अस्पताल प्रबंधन के पास कोई उपाय नहीं बचा है। गौरतलब है कि पहले से ही अस्पताल में डॉक्टरों का टोटा है। डॉक्टरों के 8 पद स्वीकृत होने के बाद भी यहां सिर्फ 4 डॉक्टर ही पदस्थ हैं। महिला डॉक्टर के त्याग पत्र से अब तीन डॉक्टरों पर ही ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले सैकड़ों मरीजों के उपचार की जिम्मेदारी रहेगी। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन को आने वाले दिनों में अधिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
कार्रवाईकरने का मलाल- मामलेमें डॉ. मेहता से त्याग पत्र का कारण जानने की कोशिश की गई। मगर उनसे चर्चा नहीं हो सकी। अस्पताल सूत्रों के अनुसार कुछ शरारती युवकों द्वारा आए दिन महिला डॉक्टर को टारगेट बनाया जा रहा था। बीते सप्ताह हुई दो दुर्घटना की घटनाओं में इलाज में लापरवाही करने का आरोप भी डॉ. मेहता पर लगाकर उनके साथ अशोभनीय व्यवहार किया गया था। इसके विरोध में डॉक्टरों ने हड़ताल भी की थी। प्रशासन ने डॉक्टरों को आश्वस्त किया था कि दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। मगर कोई नतीजा नहीं निकलने पर आक्रोश में आकर डॉ. अंकिता ने उक्त कदम उठाया है।
^पारिवारिक कारणों के चलते डॉ. अंकिता ने सेवाएं देने में असमर्थता जताई है। शनिवार को उनका इस्तीफा मुझे प्राप्त हुआ है। कमलसोलंकी, मेडिकलऑफिसर, सरकारी अस्पताल, नागदा
यह प्रभाव पड़ेगा
डॉ.अंकिता के जाने से अब अस्पताल में एक भी महिला डॉक्टर नहीं है। शहर के अलावा क्षेत्र के 40 से अधिक गांवों के लोग यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से प्रसूति के केस यहां पहुंचते हैं। अब मजबूरन ऐसे केसों को निजी अस्पतालों उज्जैन रैफर करना पड़ेगा। इससे गरीब मरीजों पर आर्थिक भार पड़ेगा। इमरजेंसी की स्थिति में प्रसूता की जान का जोखिम भी बढ़ जाएगा।