चालीसवें पर देर रात तक निकले ताजिये
सजदा ये कैसा पेश कर गए हुसैन.......कुछ इस तरह के मरसिए हजरत इमाम हुसैन की शहादत में चालीसवां पर्व पर शहर में गूंजे। हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने सच्चाई के खातिर अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया था। शनिवार को चालीसवां पर्व पूरे शबाब पर रहा और ताजियों का कारवां देर रात तक झिलमिलाता रहा। हुसैन की शहादत में हर कोई दुआ मांग रहा तो मुस्लिम क्षेत्रों में हलीम का वितरण किया गया।
शनिवार रात बड़े छोटे साहब सहित करीब 30-40 ताजियों बुराक का मुकाम उठा। विभिन्न क्षेत्रों में मुकाम लिए ताजियों का कारवां अपने मुकाम से उठकर विभिन्न मार्गों से होकर जलसे के रूप में तब्दील हुआ। यहां देर रात तक ताजियों का कारवां निकला और समाजजन हुसैन की याद में मरसिए सुनने पहुंचे। चालीसवां पर्व को लेकर यहां आसपास सहित इंदौर राजस्थान से भी मरसिए पढ़ने कलाकार पहुंचे थे।
मन्नतियोंने चढ़ाया चढ़ावा- मन्नतपूरी होने पर समाज के साथ अन्य लोग भी बड़े साहब छोटे साहब के यहां हलीम, शरबत, रेवड़ी, सिन्नी सेहरा चढ़ाते नजर आए। यहां मन्नतियों के साथ ही चालीसवां पर्व में शामिल होने के लिए आसपास के क्षेत्र सहित अन्य प्रांतों से भी समाजजन शामिल हुए। चालीसवां पर्व पर ताजियों के कारवें के साथ जगह-जगह मन्नतियों सहित समाजजनों ने सबीले बनाए।
ताकि यहां आने वाले समाजजनों को पानी, शरबत सहित अन्य व्यवस्था हो सके।
आज होगा कर्बला के लिए रवाना
रविवारदोपहर नमाज के बाद ताजियों का कारवां दोबारा शुरू होगा। जो मिर्ची बाजार, पुरानी नपा, चंबल सागर मार्ग होते हुए कर्बला मैदान पहुंचेगा। यहां पहुंचकर ताजियों का कारवां समाप्त होगा।
बड़े साहब का झिलमिलाता ताजिया जियारत करने पहुंचे जायरिन।