पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • 5600 रुपए की वेतनवृद्धि देने काे तैयार ग्रेसिम प्रबंधन

5600 रुपए की वेतनवृद्धि देने काे तैयार ग्रेसिम प्रबंधन

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
}संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा में शामिल श्रमिक नेताआें ने गेट मीटिंग में जानकारी दी }कोर्ट में मामला जाने की संभावना पर श्रमिकाें से मांगा मार्गदर्शन

भास्करसंवाददाता | नागदा

पांचसालाना समझौते को लेकर ग्रेसिम उद्योग प्रबंधन संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा के बीच जारी गतिरोध सुलह में तब्दील होता दिखाई दे रहा है। ऐसी स्थिति में संभावना है कि साल के अंत तक समझौते की राह निकल सकती है। मंगलवार शाम संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा ने उद्योग के पॉवर हाउस गेट पर मीटिंग लेकर श्रमिकों को अब तक समझौते को लेकर प्रबंधन से हुई चर्चा का संपूर्ण ब्यौरा भी दिया है। मोर्चा प्रवक्ता ने श्रमिकाें को संबोधित करते हुए बताया कि प्रबंधन सीटीसी में 5050 के बजाए 5200 रुपए 400 रुपए क्वालिटी बोनस के साथ प्रतिमाह 5600 रुपए की वृद्धि करने को तैयार है। एक्सग्रेशिया राशि सीजिंग से हो रहे नुकसान की भरपाई के रूप में अब 1200 के बजाए प्रबंधन 1350 रुपए अतिरिक्त देने को तैयार है। मीटिंग में मोर्चा प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि उक्त प्रस्ताव पर प्रबंधन ने अभी सहमति नहीं दी है। श्रमिकाें का जो आदेश होगा उसी के अनुरूप श्रम संगठन आगे कोई कदम उठाएंगे। इस दौरान श्रमिकाें को यह भी जानकारी दी गई कि प्रबंधन समझौते पर इससे अधिक वेतनवृद्धि करने को तैयार नहीं है। अधिक से अधिक जोर लगाने पर वृद्धि का आंकड़ा 6 हजार रुपए तक पहुंच सकता है। इसके बाद प्रबंधन समझौते को कोर्ट में ले जा सकता है। जो किसी भी सूरत में श्रमिकों के लिए हितकारी नहीं होगा।

स्थानीयको रोजगार की बात- प्रवक्ताराठौड़ इंटक नेता विजयसिंह रघुवंशी ने कहा कि समझौते में स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता उद्योग में कार्यरत श्रमिकों के बच्चों को नौकरी देने के प्रस्ताव पर भी मोर्चा ने जोर दिया है। साथ ही नई भर्ती में ठेका श्रमिकों लाइन कार्ड वाले श्रमिकों को प्राथमिकता देने का बदलाव भी प्रबंधन पर बनाया गया है।

जोहार गए वह भी साथ दें- मीटिंगके दौरान नपा चुनाव में जीतने हारने वाले उम्मीदवारों से अनुरोध करते हुए श्रमिक नेताओं ने कहा कि जीतने हारने वाले दोनों उम्मीदवारों को श्रमिकाें ने वोट दिया है। ऐसी स्थिति में ऐसा हो कि हारने वाला अपनी जिम्मेदारी भूल जाए। श्रमिकाें के हित में वह भी पूर्व की भांति ही प्रबंधन पर दबाव बनाए रखे, ताकि श्रमिक हित में अच्छा समझौ