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अपने ही वार्ड में दिग्गजों की साख हुई खराब
नगरसरकार का गठन हुए 36 घंटे बीत चुके है। सियासत की चौसर पर भाजपा ने कांग्रेस से 13 के मुकाबले 20 सीटें हासिल कर बाजी तो जीत मार ली। लेकिन 2009 में जीती 27 सीटों के मुकाबले भाजपा 20 पार्षदों पर सिमट गई। हालांकि नगर सरकार के हर फरमान पर हस्ताक्षर करने का अधिकार तो भाजपा को ही मिला है। लेकिन मोदी, शिवराज, उस पर विकास का दावा करने के बाद भी नपा चुनाव में हासिल हुआ रिपोर्ट कार्ड भाजपा की रैंक को प्रभावित होना बता रहा है।
राज्य निर्वाचन आयोग से सोमवार को मिली नपा चुनाव की मतदान सूची में कुछ आंकड़े इसी पर फोकस करते हैं। नपा अध्यक्ष की कुर्सी पर तीन बार काबिज होने वाले बालेश्वर दयाल जायसवाल की पेनल से खड़े प्रत्याशी कमल मालवीय को उनके ही गृह वार्ड से मात्र 7 वोट मिले। वह भी उनके अपने ही वार्ड से। यह हैरान करने वाली बात है कि जायसवाल के परिवार में ही 50 वोट है, तब गड़बड़ कहां हुई। पूर्व विधायक दिलीपसिंह गुर्जर के गृह वार्ड क्र. 10 में भी भाजपा को 316 वोटों से लीड मिली। क्षेत्रीय विधायक दिलीपसिंह शेखावत स्वयं लड़े तो 8500 वोट से शहर से ही आगे थे। लेकिन जिद कर अशोक मालवीय को टिकट दिलाया, वह मात्र 2545 मतों से ही किसी तरह जीत ही गए। आलाकमान उनसे जरूर पूछेगा कि 2009 के चुनाव में तो शहर विकास की कसौटी थी। ही मोदी-शिवराज की लहर। बावजूद शोभागोपाल यादव लगभग 3300 वोट से नपा अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुई। तो भाजपा नेता यह तो बताए- भूल कहां हुई।