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ग्रेसिम की कैंटीन में भोजन थाली पर भी बढ़ाए रुपए

5 वर्ष पहले
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श्रम नीतियों की अवहेलना से पहले ही श्रमिक परेशान है, उस पर ग्रेसिम प्रबंधन ने उद्योग की कैंटीन में मिलने वाली खाद्य वस्तुओं के दामों में बढ़ोतरी कर श्रमिकों के मुंह से निवाला छीनने की तैयारी भी कर ली है। दुर्भाग्य यह है कि मजदूरों के साथ खुलेआम अत्याचार पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि विरोध करने के बजाए खामोश हो तमाशा देख रहे हैं।

शुक्रवार को मीडिया से चर्चा में यह आरोप शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुबोध स्वामी ने लगाया है। स्वामी ने बताया कि 1 फरवरी से उद्योग प्रबंधन ने कैंटीन में खाद्य सामग्री के मूल्य में अचानक बढ़ोतरी कर भोजन की थाली में भी दो रुपए का इजाफा कर दिया है। यह श्रमिक हित में कतई नहीं है। प्रबंधन सोची समझी रणनीति के तहत आए दिन नए शगुफे छोड़ रहा है। इसके बाद भी स्थानीय विधायक, सांसद, मंत्री एवं श्रम संगठन प्रबंधन की मनमानी पर अंकुश लगाने की कोशिश तक नहीं कर रहे। प्रदेश सरकार की नीतियों, आदेश तक की नाफरमानी ग्रेसिम उद्योग कर रहा है। सेवानिवृत्ति आयु 58 से 60 वर्ष करने के जारी हुए आदेश के डेढ़ वर्ष बाद भी श्रमिकों को अभी भी 58 साल में ही सेवानिवृत्ति दी जा रही है।

श्रमिकों पर दबाव बनाने का षड्यंत्र- स्वामी ने बताया प्रबंधन उद्योग को पूरी तरह ठेका पद्धति से संचालित करना चाहता है। बाहरी ठेकेदारों को तवज्जो दे रहे हैं। इसलिए यहां के श्रमिकों को नजरअंदाज कर अन्य शहरों से श्रमिक बुलाए जा रहे। 1 फरवरी से वेलफेयर विभाग के श्रमिकों के कार्ड बंद कर दिए हैं। अन्य विभागों के श्रमिकों पर भी नौकरी छोड़ने के लिए दबाव बनाया है। श्रमिक फिलहाल चुप है, लेकिन अगर यह सड़कों पर आया तो प्रबंधन के साथ प्रशासन के लिए लॉ-एंड आर्डर की स्थिति संभालना मुश्किल होगा। स्वामी ने श्रमिक व शहर हित में तत्काल प्रभाव से खाद्य सामग्री की कीमतों में की गई बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की है।

यह तो मनमानी है
स्वामी ने बताया कि बीते 50 सालों में विभिन्न समझौते में श्रमिकों का कैंटीन अलाउंस बढ़ाने के बाद भी प्रबंधन ने कभी भी खाद्य सामग्री के मूल्य नहीं बढ़ाए। लेकिन बीते वर्ष ही संपन्न हुए पांच साला समझौते में कैंटीन अलाउंस में बढ़ोतरी तो प्रबंधन ने नहीं की, लेकिन खाद्य सामग्री के मूल्य जरूर बढ़ा दिए हैं।

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