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कृमिनाशक गोली खाते ही एक दर्जन बच्चों की तबीयत बिगड़ी
शहरसे 8 किमी दूर स्थित ग्राम पिपल्या मोलू में पेट के कीड़े मारने वाली गोली (एलबेंडाजोल) खाने से करीब एक दर्जन बच्चे बीमार हो गए। जिन्हें सूचना पर 108 एम्बुलेंस सरकारी अस्पताल लेकर पहुंची। बच्चों के स्वस्थ होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, लेकिन घटना के बाद बच्चों को गोलियां िखलाने से अभिभावक परहेज कर रहे हैं।
राष्ट्रीय कृमि दिवस के तहत सभी स्कूलों में मंगलवार को कृमि दिवस मनाया था। इसमें बच्चों को पेट के कीड़े मारने की गोलियां खिलाई थी। शासकीय प्रावि में मंगलवार को 55 बच्चों को गोलियां खिलाई गई थी। बुधवार को आशा कार्यकर्ता रजिया बी सहयोगी शायना मंसूरी ने स्कूल की प्रधानाध्यापिका ताजनी शेख के सामने ही शेष 11 बच्चों को गोलियां खिलाई। गोलियां खाने के 5 मिनट बाद ही बच्चों को जी मचलाने की शिकायत होने लगी। बच्चों के बीमारी होने की जानकारी पर ग्रामीणजन भी स्कूल पहुंच गए। सूचना पर तत्काल 108 एम्बुलेंस गांव पहुंची और बच्चों को सरकारी अस्पताल लेकर पहुंची। कुछ बच्चों को ग्रामीण बाइक पर भी लेकर आए। उपचार के बाद बच्चों की हालात में सुधार है। घटना के बाद अभिभावकों में डर बैठ गया, इसलिए उन्होंने बच्चों को गोली खिलाने से स्पष्ट मना कर दिया।
यहबच्चे हुए थे बीमार- लक्ष्मीपिता करणसिंह, अनिल पिता जगदीश, जितेंद्र पिता बापूलाल, पूजा पिता नाथूलाल, धर्मेंद्र पिता दुर्गालाल, बंटी पिता लालू, माया पिता बापूलाल, माखन पिता करणसिंह, कान्हा पिता विष्णुलाल, नेपाल पिता मदनलाल, रानी पिता दुर्गालाल की गोलियां खाने के बाद तबीयत खराब हुई थी। बच्चों की उम्र 7 से 10 वर्ष है। उपचार के बाद बच्चों काे छुट्टी भी दे दी गई।
दवाई से कीड़े मरने पर आते हैं चक्कर
बीएमओडॉ. संजीव कुमरावत ने बताया कि पेट के कीड़ों को मारने के लिए एलबेंडाजोल नामक दवाई बच्चों को दी जाती है। जिन बच्चों के पेट में कीड़े अधिक होते हैं, उन्हें दवा पिलाने पर चक्कर, पेट दर्द, दस्त, उल्टी, थकान की शिकायत होती है। कारण पेट के कीड़े जब मरते हैं तो उससे इस तरह की शिकायत उभरकर आती है। लेकिन इससे बच्चों को कोई नुकसान नहीं होता है। बुधवार को भी इसी कारण बच्चों को चक्कर आने की शिकायत हुई थी।
बच्चों को देख आशा कार्यकर्ता घबराई।
अस्पताल में भर्ती बीमार बच्चे।