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भारत कॉमर्स बंद कराने वाले ग्रेसिम उद्योग भी बंद कराना चाहते हैं

7 वर्ष पहले
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वर्ष2000 में भारत कॉमर्स उद्योग के श्रमिकों को ग्रेसिम के बराबर बोनस दिलाने का सपना दिखाकर श्रमिक आंदोलन के बहाने उद्योग पर ताले डलवा दिए गए। वोट की राजनीति में श्रमिकों का दोहन किया गया। परिणाम आज उद्योग के हजारों श्रमिक बेरोजगार होकर किसी तरह परिवार चला रहे हैं। यही कोशिश ग्रेसिम उद्योग के समझौते के दौरान शहर कांग्रेस कर रही है। यह आरोप मीडिया को दिए बयान में मोर्चा प्रवक्ता लल्लनप्रसाद ने लगाया है। उन्होंने बताया कांग्रेस मजदूरों को गलत जानकारी देकर भरमा रही है। 22 सितंबर को जब संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा उज्जैन में सहायक श्रमायुक्त के साथ चर्चा कर रहा था। उसी दौरान शहर में शहर कांग्रेस अध्यक्ष कार्यकर्ताओं को लेकर श्रमिकों को उद्योग गेट पर गलत जानकारी दे रहे थे। उन्होंने 6800 रुपए की वेतनवृद्धि 1000 रुपए मेडिक्लेम बीमा अन्य लाभों के साथ समझौता संपन्न होने का दावा तक जता दिया, जो सरासर गलत है। श्रमिकों को गलत जानकारी देने का संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा विरोध करता है। सच्चाई यह है कि ग्रेसिम प्रबंधन की ओर से समझौता वार्ता अभी चल ही रही है। प्रसाद के अनुसार प्रबंधन 3000 वेतनवृद्धि 600 रुपए प्रोडक्शन बोनस देने पर ही अड़ा हुआ है। प्रबंधन से मोर्चा की लड़ाई जारी है। ऐसे में श्रमिकों को भरमाने वाले कांग्रेसी मोर्चा पर लगाए आरोप के प्रमाण दें तो मोर्चा सदस्य श्रमिक राजनीति से संन्यास लेंगे। श्रमिकों से अनुरोध है कि वे किसी के बहकावे में आए मोर्चा में शामिल पांचों श्रम संगठनों पर विश्वास रखे। समझौते में किसी तरह भी मजदूर हित प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।