गंगा पार करने केवट से किया अनुरोध
कार्यालय संवाददाता| नरसिंहगढ़
पुरानीकोतवाली में चल रही रामलीला में गुरुवार रात कलाकारों ने भगवान श्रीराम के गंगा पार उतरने के प्रसंग का मंचन किया। प्रभु श्रीराम सीता माता और लक्ष्मण जी के साथ गंगा पार उतरने के लिए जैसे ही केवट की नाव में बैठने लगे, उसने उन्हें रोक दिया।
केवट को शक था कि श्रीराम के चरणों का स्पर्श पाते ही बेजान वस्तुएं स्त्री बन जाती हैं, जैसे पत्थर की शिला अहिल्या बन गई थी। केवट डर गया कि अगर उसकी नाव स्त्री बन गई तो उसकी तो रोजीरोटी ही मारी जाएगी।
सुमंत्र के समझाने पर भोले केवट ने प्रभु के चरणों को धोकर उन्हें नाव में चढऩे की इजाजत दी, ताकि उनके पैरों से वस्तुओं को स्त्री बनाने का जादू खत्म हो जाए। गंगा पार उतरते समय सीताजी ने केवट को मजदूरी के तौर पर अपनी अंगूठी देनी चाही, लेकिन उसने नहीं ली। तब प्रभु ने अपनी भक्ति का वरदान उसे दिया।
रामायण के इस मार्मिक प्रसंग के मंचन के दौरान कलाकारों ने अपने अभिनय से कई बार दर्शकों को भावुक कर दिया। रोज रात को 8 बजे से शुरू होने वाली रामलीला देखने बडी तादाद में दर्शक पहुंच रहे हैं।
भगवान राम और केवट के परिवार के बीच संवाद का मंचन करते कलाकार।