तीन बार ढहा मकान, मुआवजा सिर्फ ~1900
कार्यालय संवाददाता| नरसिंहगढ़
वार्ड1 में रहने वाले श्रमिक गोविंद कोली का घर पिछले 3 सालों से हर साल बारिश में ढहता रहा और प्रशासन ने उसके मुआवजे के लिए महज 1900 रुपए मंजूर किए। हताश गोविंद ने अब मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में की है अौर ज्यादा मुआवजे की मांग की है ताकि अपने घर को दुरुस्त कर रहने लायक बना सकें।
गाेविंद अपनी बुजुर्ग और बीमार मां लक्ष्मी बाई के साथ अपने पुराने जर्जर घर में रह रहे हैं। वर्ष 2012 से इस घर के हिस्से बारी-बारी से हर साल बारिश में ढहते चले गए। अगस्त 2014 में उन्होंने इसकी शिकायत तहसील कार्यालय में की। सर्वे के बाद पिछले दिनों उन्हें 1900 रुपए के मुआवजे की सूचना दी गई। तहसील कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक गोविंद के मकान में 45 प्रतिशत क्षति पाई गई थी। इस आधार पर मुआवजे की राशि शासन स्तर से निर्धारित की गई है।
पिछले दिनों हुई बारिश में तो यह हालत हो गई कि मकान के बचे हुए हिस्से में भी कहीं सिर छिपाने की जगह नहीं बची। चूल्हा तक पानी में डूब गया। दोनों मां-बेटों ने एक कोने में बैठकर जैसे-तैसे खुदको पानी से बचाने की काेशिश की। बाद में 1200 रुपए खर्च कर गोविंद बाजार से बरसाती खरीदकर लाए और जर्जर छत पर तानकर घर को रहने लायक बनाया।
पिछले साल तेज बारिश के दौरान शहरी क्षेत्र के सूरजपोल मोहल्ले में एक मकान ढह जाने से दो बालिकाओं की मौत हो गई थी। फाइल फोटो।