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जांच शुरू हुई तो खाते में दोबारा जमा की राशि
कार्यालय संवाददाता|नरसिंहगढ़
शिवपुरापंचायत के गेहूंखेड़ी गांव के एक व्यक्ति ने मनरेगा के घोटाले की शिकायत मुख्यमंत्री से की तो आनन-फानन में पंचायत ने उसके खाते में भुगतान की राशि डाल दी। सबसे बड़ी बात यह है कि उस व्यक्ति और उसके परिवार ने मनरेगा में कभी काम किया ही नहीं था। अब उस व्यक्ति ने मुख्यमंत्री को दोबारा शिकायत कर पूर्व में उसके फर्जी दस्तखत कर पैसा निकालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मामला गेहूंखेड़ी के हकीम खां का है। मार्च 2014 में उसने कंप्यूटर सेंटर से अपने मनरेगा जॉब कार्ड की जानकारी निकलवाई, तब पता चला कि उसके और उसकी प|ी के नाम से 6 हजार से ज्यादा की राशि पंचायत द्वारा निकाल ली गई। जबकि जॉब कार्ड हकीम खां के पास ही था और पूरी तरह खाली था। इसके बाद उसने स्थानीय और जिला प्रशासन से शिकायत की। जब सुनवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री ऑनलाइन शिकायत प्रकोष्ठ का सहारा लिया।
पंचायत की धोखाधड़ी का शिकार हुए सलीम खां और हकीम खां।
...और भी लोगों के साथ हो चुकी हैं गड़बड़ियां
शिवपुरामें हकीम खां का मामला इकलौता नहीं है। और भी लोगों ने जब जॉबकार्ड का रिकॉर्ड कंप्यूटर सेंटर से निकलवाया तो फर्जी तरीके से उनके खातों से राशि निकालने के मामले उजागर हुए। जबकि मांगने के बाद भी इन लोगों को कभी पंचायत ने रोजगार नहीं दिया। इनके जॉब कार्ड अब तक खाली पड़े हैं, लेकिन पंचायत के मस्टर में इन लोगों को मजदूरी के कार्य दिवस और भुगतान किया जाना दर्ज है। इन सभी ने सीधे मुख्यमंत्री से शिकायत कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। ऐसे ही 3 लोगों के जॉबकार्ड से 43 हजार 308 रुपए का भुगतान फर्जी तरीके से निकाल लिया गया।
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सलीम खां: परिवारके कुल 8 सदस्यों के नाम जॉबकार्ड में दर्ज हैं। पंचायत ने अपने ऑनलाइन रिकार्ड में इन सभी को 31 मई 2009 से 14 मार्च 2013 तक गांव में किए गए निर्माण कार्यों में काम देना बताया है। इसके बदले इन्हें 24 हजार 494 रुपए का भुगतान दर्शाया गया है, जो वास्तव में आज तक इन्हें नहीं मिला है।
रहमानखां: परिवारके कुल 4 सदस्य जॉबकार्ड में दर्ज हैं। पंचायत ने कभी काम नहीं दिया, लेकिन अपने रिकार्ड में 24 मई 2009 से 14 मार्च 2013 तक 13 हजार 702 रुपए का भुगतान दर्शा दिया।
रमजानीखां: परिवारके कुल 2 सदस्यों को 10 मई 2011 से 5 फरवरी 2013 तक 5 हजार