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मानव अधिकार पर एक नजर

7 वर्ष पहले
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उधार देने वाले अब खुद उधारी से चला रहे जिंदगी

कार्यशाला में उठाएंगे मुद्दा

कार्यालय संवाददाता|नरसिंहगढ़

जिलासहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के कर्मचारियों को पिछले डेढ़ साल से वेतन नहीं मिला है। इससे इन परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हा़े गया है। जिले के कई ब्लॉकों में तो पिछले 4 साल से वेतन नहीं बांटा गया है। परेशान कर्मियों के मुताबिक शासन ने एक तरफ तो किसानों के ऋण माफ कर दिए हैं वहीं दूसरी तरफ बैंक से किसानों को फायनेंस करने के अधिकार छीन लिए हैं। इससे बैंक की हालत खराब हो गई है। कर्मचारियों ने मांग की है कि बैंक को यदि बंद करना है तो बंद करके कर्मचारियों को दूसरे विभाग में संविलियन कर दिया जाए।

भूलगए कि 1 तारीख काे वेतन मिलता भी है

बैंकके कर्मचारियों ने पिछले करीब 6 सालों से एकमुश्त वेतन की शक्ल नहीं देखी है। शुरू में तो उन्हें वरिष्ठ कार्यालय से आंशिक भुगतान होता रहा। इसमें भी हालत यह थी कि चार- छह महीने में एक बार वेतन मिलता था। वह भी महज एक महीने का। अप्रैल 2013 से यह सिलसिला भी बंद हो गया। कर्मचारियों का कहना है कि वे भूलने लगे हैं कि 1 तारीख को वेतन भी मिलता है।

पीएफमिला ग्रेच्युटी

खराबहालत की वजह से बैंक के एक पूर्व कर्मचारी ने इसी साल राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। मानव अधिकार के आयोग मित्र राजीव शेखर शर्मा ने बताया कि बैंक के जिला कार्यालय के वरिष्ठ भृत्य नन्नू लाल वर्मा 31 मई 2014 को रिटायर हुए थे। रिटायरमेंट के 36 महीने पहले से उनका पीएफ कटना बंद हो गया था और अगस्त 2011 से उन्हें वेतन नहीं मिला था। रिटायरमेंट के बाद उन्हें ग्रेच्युटी भी नहीं मिली। इससे उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हा़े गया है। बार-बार मांग के बावजूद जब उनकी समस्या नहीं सुलझी तो उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी। उनका मामला आयोग मित्र के जरिए मानव अधिकार आयोग में भी पहुंचाया गया है।

बंदहो गईं बैंक की तीन दूसरी शाखाएं

ब्लॉकमें बैंक की पूर्व में 5 शाखाएं थीं। इनमें कुरावर, बोड़ा, तलेन, बैरसिया और नरसिंहगढ़ की शाखाएं शामिल थीं। वसूली नहीं होने की वजह से बोड़ा, तलेन, बैरसिया की शाखाएं बंद हो गईं। ब्लॉक में यह स्थिति है कि जहां सन 2006 में 7 हजार से ज्यादा किसान बैंक के ग्राहक थे, वहीं अब महज