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जर्जर स्कूल भवनों में पढ़ाई कर रहे बच्चे
कार्यालय संवाददाता| नरसिंहगढ़
शासकीयस्कूलों की इमारतों की जर्जर हालत पर प्रशासन का ध्यान नहीं है। ज्यादातर स्कूल बेहद क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं। इससे इनमें पढ़ने वाले बच्चों के ऊपर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। स्कूलों के ज्यादातर हिस्सों को बंद कर दिया गया है। इससे जगह की कमी भी बनी हुई है। राज्य शासन से इन इमारतों की दुरुस्ती के लिए अलग से किसी तरह की योजना को मंजूरी नहीं दी गई है। सर्व शिक्षा अभियान और आरएमएसए के तहत जो काम करवाए जाते हैं, उनकी रफ्तार बेहद धीमी होने से भी स्कूलों में वाजिब सुधार नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में कमजोर आर्थिक स्थिति वाले अभिभावकों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का सपना टूटता नजर रहा है।
इनस्कूलों की हालत ज्यादा खराब: शासकीयकन्या मिडिल स्कूल शिवजी का चौक, शासकीय बुनियादी मिडिल स्कूल, शासकीय प्रायमरी स्कूल सराय और पुरानी कोतवाली, शासकीय मिडिल स्कूल बग्घी खाना आदि।
शास. कन्या मिडिल स्कूल का बडा हिस्सा जर्जर होने की वजह से किसी काम नहीं रहा है।
पुरातात्विक धरोहर हैं ज्यादातर स्कूलों की इमारतें
शहरके ज्यादातर पुराने स्कूल पुरातात्विक धरोहरें हैं। इनमें रियासती दौर की राजस्व, शिक्षा, मनोरंजन आदि की गतिविधियां संचालित होती थीं। कन्या मिडिल स्कूल तो रियासती दौर से स्कूल के तौर पर ही संचालित होता रहा है। इस लिहाज से इन स्कूलों के मूल स्वरूप को कायम रखते हुए इनके विकास की योजना की बडी़ जरूरत है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
प्रस्ताव भेजे हैं
^स्कूलोंकी इमारतों की दुरुस्ती के लिए शासन को हमने प्रस्ताव भेजे हैं। साथ ही नए प्रस्ताव भी तैयार किए जा रहे हैं। जल्दी ही स्कूलों की हालत सुधरेगी। कई स्कूलों में सुधार और नए निर्माण भी किए जा रहे हैं। अजीतकुमार पांडे, बीआरसीनरसिंहगढ़