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हादसे के सवा महीने बाद भी नहीं मिली राहत राशि
बीस दिनों तक एसडीएम कार्यालय में दबी रही फाइल
कार्यालय संवाददाता| नरसिंहगढ़
सूरजपोलक्षेत्र में अगस्त 2014 में मकान ढहने से हुई दो बालिकाओं की मौत के मामले में पीड़ित परिवार को अब तक शासन से किसी तरह की आर्थिक मदद नहीं मिली है। इससे परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि इस मामले में मदद देने के लिए मुख्यमंत्री ने खुद आश्वासन दिया था। स्थानीय स्तर से 3.75 लाख की सहायता राशि के लिए प्रस्ताव बनाकर जिला प्रशासन को भेजा जा चुका है। जिला प्रशासन का कहना है कि वरिष्ठ स्तर से ही राशि अब तक नहीं मिली है। हादसे से बचकर निकले परिवार के बाकी सदस्य नगरपालिका के सूरजपोल सामुदायिक भवन के एक कमरे में जैसे-तैसे शरणार्थियों की तरह दिन बिता रहे हैं। रहने का कोई ठिकाना है और ही खाने-पीने के लिए भोजन और पहनने के कपड़ों का कोई स्थाई इंतजाम है।
पथरागई मां की जुबान
हादसेमें अपनी दो मासूम बेटियों को गंवा चुकीं राजनारायण शर्मा की प|ी हेमलता घटना के बाद से एक शब्द नहीं बोली हैं। उन्हें सिर में घातक चोट लगने से सिफेलिक एंज्यूरी है। छह बच्चों की मां हेमलता के लिए अपनी दो बेटियों को खोना अपनी जिंदगी के एक हिस्से को गंवा देने जैसा है। हादसे ने उन्हें इस कदर तोड़ दिया है कि जो बच्चे बच गए हैं, वे उन पर भी ध्यान नहीं दे पा रही हैं। सबसे बडी बेटी अर्चना पेल्विक कंपाउंड फ्रेक्चर होने से हादसे के बाद से बिस्तर पर है। 25 अगस्त को सिविल मेहताब अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद से उसका प्रायवेट इलाज चल रहा है। जिस पर अब तक करीब 50 हजार रुपए खर्च हो चुका है। परिवार के सदस्य कर्ज लेकर सारे इंतजाम कर रहे हैं।
फेलहो गया था प्रशासन
पूरेवाकये के दौरान स्थानीय प्रशासन किसी तरह के बचाव इंतजाम नहीं कर पाया। बचाव के कोई संसाधन थे ही नहीं। हालांकि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस जरूर मौके पर पहुंची थी। बाद में देर रात कलेक्टर और एसपी घटनास्थल पर पहुंचे। हादसे के दौरान अगर पर्याप्त आपदा प्रबंधन होता तो दोनों बच्चियों को बचाए जाने की पूरी संभावना थी।
तीन घंटे में उजड़ गया था परिवार
11अगस्त 2014 की शाम शहर के लोग भुजरिया पर्व की खुशियां मनाने में मशगूल थे। तभी सूरजपोल मोहल्ले में रहने वाले राजनारायण शर्मा के परिवार पर मौत ने अचानक धावा बोल दिया था। लगातार कई दिनों से हो रही बारि