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सातवें दिन कांकड़ आरती से हुई उत्सव की शुरुआत
कार्यालय संवाददाता|नरसिंहगढ़
श्रीसद्गुरू आश्रम में चल रहे सद्गुरू निर्वाण महोत्सव के सातवें दिन गुरु भक्तों ने आध्यात्मिक प्रवचन दिए। उत्सव की शुरुआत सुबह कांकड़ आरती से हुई। प्रथम सत्र में हंसानंद महाराज ने आध्यात्मिक मार्ग से श्रीसद्गुरू की प्राप्ति के बारे में बताया। दोपहर में हैदराबाद के गुरु भक्तों के भजन हुए। इसके बाद इंदौर की शोभा ताई काशीकर ने जीव के बार-बार जन्म लेने के आध्यात्मिक पहलू के बारे में बताते हुए कहा कि अविनाशी, शाश्वत और आनंद स्वरूप परमेश्वर को भूल जाना ही अविद्या है और अविद्या की वजह से जीव बार-बार संसार में जन्म लेता है। उन्होंने वासना की व्याख्या करते हुए कहा कि पंच विषयों के भोगों में आसक्ति और उन्हें भोगने की बार-बार याद आना ही वासना है। यह पांच प्रकार की होती है। इनमें लोक, शास्त्र, शुद्ध, ज्ञेय और ध्येय वासनाएं शामिल हैं। इसीलिए नर देह में रहते हुए श्रीसद्गुरू का ध्यान कर मोक्ष प्राप्त करने के प्रयास में लगे रहना चाहिए। तीसरे सत्र में देवगांव से आईं गुरू भक्त आनंदमई ने गुरु महिमा के बारे में बताया और गुरु-कीर्तन किया।
नरसिंहगढ़|श्री सद्गुरूआश्रम में चल रहे प्रवचन सुनते हुए गुरू भक्त।
आज होगा समापन
दत्तसंप्रदाय के वारकरी मत के सद्गुरू बलभीम महाराज का 105 वां निर्वाणोत्सव शुक्रवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाएगा। इसके साथ श्री सदगुरु निर्वाण महोत्सव का समापन हो जाएगा। इस मौके पर सुबह 7.30 बजे गुरु उपनिषद के 11 आवर्तन किए जाएंगे। इसके बाद सभी गुरू भक्त मिलकर तीर्थराज पूजन करेंगे। शाम को गुरुभक्त काशीकर के प्रवचन होंगे। शनिवार को महाप्रसादी वितरण होगा।