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परशुराम सागर के लिए अब तक नहीं बना प्रोजेक्ट
कार्यालय संवाददाता| नरसिंहगढ़
शहरके जलस्तर को निर्धारित करने वाले परशुराम सागर के विकास और संरक्षण को लेकर अब तक स्थानीय प्रशासन ने किसी तरह की योजना नहीं बनाई है। तालाब में गंदगी की वजह से गाद बढ़ती जा रही है और कई हिस्सों में अतिक्रमण कर लिया गया है। किनारे की बस्तियों की सीवेज लाइनें तालाब में खुल रही हैं। इससे पानी स्थाई रूप से प्रदूषित हो गया है। कभी धार्मिक आस्था के साथ लोगों के दैनिक जीवन से गहरे तक जुडे़ तालाब से अब ज्यादातर लोग किनारा कर चुके हैं। इसी का नतीजा है कि तालाब में सीधे छोड़ी जाने वाली गंदगी को लेकर कोई भी संगठन या व्यक्ति विरोध नहीं जताता। इसके अलावा तालाब के किनारों पर जर्जर पाल, घाट और क्षतिग्रस्त पुराने मंदिर, बीच में मौजूद जल मंदिर का अधूरा काम, चोरी जा रहीं सुरक्षा जालियां और सुरक्षा इंतजाम नहीं होना बडी़ समस्या बने हुए हैं।
इसलिएजरूरी है तालाब का विकास: हरसाल लगातार बढ़ रहे तापमान से जलस्तर को बनाए रखने के जलसंग्रह केंद्रों का विकास जरूरी है। परशुराम सागर करीब 6 हेक्टेयर के दायरे में फैला है और 300 से ज्यादा सालों से शहर के बड़े हिस्से के जलस्तर को रोकने का काम कर रहा है।
शहरऔर आसपास कितने बड़े तालाब : 5, इनमें परशुराम सागर के अलावा छोटा तालाब, फूटा तालाब, बांडाबेदरा, शंकरपुरा तालाब शामिल हैं। परशुराम सागर और छोटा तालाब नगरपालिका की संपत्ति हैं। फूटा तालाब वन विभाग का है और बांडाबेदरा, शंकरपुरा तालाब की देखरेख की जवाबदारी जल संसाधन विभाग की है।
काम पूरा होने के बाद बन सकता है प्रोजेक्ट
^मुख्यमंत्रीअधोसंरचना योजना के तहत पहले से मंजूर प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद ही परशुराम सागर के विकास और सौंदर्यीकरण का प्रोजेक्ट तैयार किया जा सकता है। पवनमिश्रा, सीएमओनगरपालिका परिषद कार्यालय नरसिंहगढ़
जहां जरूरी नहीं था, वहां बना दिया करोड़ों का प्रोजेक्ट
एकतरफ परशुराम सागर विकास के लिए प्रशासन का मुंह ताक रहा है। दूसरी ओर नगरपालिका ने पिछले साल मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना के तहत छोटा तालाब के विकास के लिए आननफानन में 2.20 करोड़ की योजना बनाकर मंजूर करवा ली। बेतरतीबी से काम भी शुरू करवा दिया गया। बाद में अनियमितताओं की शिकायत के बाद खुदाई के बाद ही काम बंद करवा दिया गया। योजना की राशि तभी से ही बिना काम के बेकार हो रही है। जबकि छोटे त