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आश्रम में बता रहे उपनिषदों के शब्दों का अर्थ
कार्यालय संवाददाता| नरसिंहगढ़
श्रीसद्गुरू आश्रम में चल रहे सात दिनों के श्री सद्गुरू निर्वाण महोत्सव के तीसरे दिन रविवार को नासिक के गुरू भक्त शशिकांत पंडित ने मुंडकोपनिषद की व्याख्या में ओंकार शब्द के अर्थ का वर्णन करते हुए बताया कि इसकी उत्पत्ति मन की शांत अवस्था से हुई है। इसके अलावा उपनिषद के अन्य पहलुओं के बारे में भी बताया। सांयकालीन सत्र में शैरंध्री कोटसथाने के कीर्तन, प्रवचन और रात 8 बजे से इंदौर की सुमन ताई मेंडके के प्रवचन हुए। इसके पहले पुणे के डॉ देवगांवकर, मुंबई के डॉ रुईकर और नागपुर की प्रतिभा मराठे ने भी अपने प्रेरक अनुभव बताए। आश्रम के संचालक पंडित बलभीम राव तोवर रोज रात को पारंपरिक शैली में प्रवचन दे रहे हैं। सात दिनों का सद्गुरू निर्वाणोत्सव शुक्रवार से शुरू हो गया है। उत्सव की शुरुआत सद्गुरू उपनिषद के 11 आवर्तन और पूजा, आरती से हुई। वारकरी संप्रदाय के सद्गुरू बलभीम महाराज के 105 वें निर्वाणोत्सव में प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र के यवतमाल, मुंबई, पुणे, नागपुर, अमरावती आदि स्थानों के गुरू भक्त शामिल हो रहे हैं।