खंडहर हो रहा महादेवी वर्मा का आवास
कार्यालय संवाददाता| नरसिंहगढ़
रविवारको हिंदी दिवस है वहीं दूसरी ओर शहर में मौजूद हिंदी की महान कवयित्री महादेवी वर्मा के बचपन का साक्षी उनके आवास की बदहाली पर किसी का ध्यान नहीं है। शासकीय श्री विक्रम उत्कृष्ट विद्यालय के पीछे बना महादेवी का आवास इन दिनों पीडब्ल्यूडी की संपत्ति है। अगर साहित्यप्रेमी अब भी नहीं चेते तो विभाग इसे कभी भी ढहा सकता है। इसे पुस्तकालय और महादेवी से जुडे़ प्रतीकों के संग्रहालय के तौर पर विकसित करने की मांग को लेकर अलग-अलग संगठन कई बार शासन को पत्र लिख चुके हैं। इसके बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
हिंदीदिवस की पूर्व संध्या पर गोष्ठी का आयोजन
नरसिंहगढ़|शनिवारको हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर हिंद कान्वेंट हायर सेकंडरी स्कूल में हिंदी का महत्व विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें प्राचार्य पंकज कौशिक ने विद्यार्थियों को बताया कि अपनी भाषा के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए। अपनी भाषा की उन्नति ही हर तरह की उन्नति का मूल है। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र की कविता निज भाषा उन्नति है, सब उन्नति को मूल के जरिए हिंदी की विशेषताओं के बारे में बताया।
इस दौरान विद्यार्थियों ने भी हिंदी में कविताएं और गीत प्रस्तुत किए। इनमें ऊषा परमार, शिवानी शर्मा, चंचल परमार, मेघा परमार, सोना मीणा, प्रिया साहू, सोनू नागर, शाहरुख शान, रोहित ओझा, नमन ओझा, शालिनी ठाकुर, सेजल यादव, सोनल यादव, विनीता मैहर, विशाल कुंभकार,सलमान आदि शामिल थे। आयोजन में स्टाफ सदस्यों का योगदान रहा।
भारतेंदु जी को जाता है हिंदी के गौरव का श्रेय
हिंदीके आधुनिक स्वरूप को स्थापित करने का श्रेय महान साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र 1850-1885 को जाता है। उन्होंने हिंदी को अवधी, बृज भाषा के प्रभाव से मुक्त कर मानक बनाया।
महादेवी के बालपन की यादें हैं इस घर में
वरिष्ठनागरिक सरदार सिंह खीची बताते हैं कि पिछली शताब्दी के शुरुआती सालों में महादेवी वर्मा के पिता बाबू गोविंदप्रसाद वर्मा तत्कालीन नरसिंहगढ़ रियासत में कर्मचारी थे। वे यहां करीब एक दशक तक रहे। यहीं महादेवी के बचपन और किशोरावस्था का समय बीता और यहीं उन्होंने कविताएं लिखना शुरू किया। उनके आवास के ठीक ऊपर पहाड़ी पर मौजूद काकशिला उनके लेखन की पसंदीदा जगह थी। महादेवी के यहां आवास की पुष्टि तत्कालीन रियासत के वार्षिक गज