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पंचायत चुनाव से प्रभावित होगी बच्चों की पढ़ाई
सबसे ज्यादा जनशिक्षकों की ड्यूटी नरसिंहगढ़ से
अगलेमहीने होने जा रहे पंचायत चुनावों का सीधा असर सरकारी और निजी स्कूलों की व्यवस्थाओं पर पड़ेगा। जिला प्रशासन ने स्कूलों की मानीटरिंग के लिए नियुक्त जनशिक्षकों को भी मास्टर ट्रेनर्स बना दिया है। इससे यह शिक्षक चुनाव होने तक अपने मूल कार्य से दूर रहेंगे और स्कूलों की मानीटरिंग प्रभावित होगी। जनशिक्षकों के जिम्मे मध्यान्ह भोजन, शासन के आदेशों और योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति, शैक्षिक और खेल गतिविधियों, शासकीय डाक पहुंचाने जैसी महत्वपूर्ण जवाबदारियां हैं। इसके अलावा यह स्कूलों के संचालन में रही परेशानियों को विभाग तक पहुंचाने का काम भी करते हैं। जाहिर है कि जब जनशिक्षक चुनावी ड्यूटी में व्यस्त रहेंगे तो यह सारे काम तो ठप होंगे ही। साथ ही आने वाले दिनों में प्रतिभा पर्व भी शुरू होने वाला है। मिडिल स्तर तक के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की शैक्षणिक योग्यता को निखारने वाले इस शैक्षिक आयोजन की तो रीढ़ ही जनशिक्षक हैं। ऐसे में जनशिक्षकों की गैरमौजूदगी से शैक्षिक व्यवस्थाओं पर बडे़ स्तर पर असर पड़ने की संभावना है।
तोक्या प्रभारी जनशिक्षक बनाए जाएंगे
जनशिक्षकोंका पद वैसे ही शिक्षकों के बीच में से तैयार किया गया है। मूलत: सभी जनशिक्षक शिक्षक ही हैं। शासन ने इन्हें स्कूलों के बेहतर संचालन के लिए जनशिक्षक का अतिरिक्त दायित्व दिया है। ऐसे में कई अभिभावकों ने पूछा है कि महीने भर तक पंचायत चुनाव के प्रशिक्षण देने वाले जनशिक्षकों की जगह पर क्या प्रभारी जनशिक्षक नियुक्त किए जाएंगे। गौरतलब है कि पहले से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों से बड़ी तादाद में शिक्षकों को चुनावी कार्य में लगा दिया जाता है। उनकी जगह पर अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति भी नहीं की जाती। जबकि शासन के आदेश के मुताबिक अगर किसी स्कूल में किसी वजह से कोई शिक्षक एक सप्ताह के लिए भी पढ़ाने नहीं सके तो उसकी जगह पर अतिथि शिक्षक की नियुक्ति की जानी चाहिए ताकि स्कूल की शिक्षण व्यवस्था सुचारू चलती रहे।
विकल्प क्या
स्कूलोंमें पहले से बड़ी तादाद में हाई स्कूल प्राचार्य, व्याख्याता, प्रधानाध्यापक मौजूद हैं। वैसे भी मास्टर ट्रेनर के रूप में कॉलेजों के व्याख्याता, स्कूलों के प्राचार्य, वरिष्ठ शिक्षक आदि पहले से अपनी सेवाएं देते रहे हैं। ऐसे में जनशिक्षकों को पहली बा