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मौलिक अधिकारों की जानकारी दी

7 वर्ष पहले
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नरसिंहगढ़ | बुधवारको अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस के मौके पर स्वयंसेवी संगठन नीर ने उपजेल में कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कांग्रेस के विधि और मानव अधिकार प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष वरिष्ठ एडवोकेट जेपी अग्रवाल थे। उन्होंने बताया कि मानव अधिकारों के क्षेत्र में हो रहे नए सुधारों के तहत सजा काट रहे कैदियों के परिवारों को अगर जीवनयापन में किसी तरह की परेशानी आती है तो उनकी मदद करने का दायित्व शासन का है। इसी तरह मानव अधिकार में गरीब की परिभाषा भी स्पष्ट की गई है। अगर किसी व्यक्ति ने कानून के नजरिए से कोई छोटा अपराध किया है, उसका पुराना रिकार्ड नहीं है और उसकी आर्थिक स्थिति ऐसी है कि वह 7 दिनों में भी अपनी जमानत का इंतजाम नहीं कर सके तो ऐसे में उसके खुद के मुचलके पर न्यायालय को उस व्यक्ति को छोड़ना होगा। उन्होंने बताया कि शिक्षा, भोजन, सूचना प्राप्त करना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार आदि जैसे मुद्दे व्यक्ति के मौलिक मानवाधिकारों के दायरे में आते हैं। उपजेल सह अधीक्षक जेवेंद्र सिंह बुंदेला ने रामचरित मानस की पंक्तियों जाके राज प्रिय प्रजा दुखारी, सो नर अवस नरक अधिकारी का उदाहरण देते हुए बताया कि अगर कहीं पर लोगों के मानव अधिकार सुरक्षित नहीं हैं तो वह शासन निकृष्ट माना जाता है। इसी वजह से आज विश्व में हर देश में मानव अधिकारों का संरक्षण पहली प्राथमिकताओं में शुमार किया गया है। आयोजन में नीर के सचिव विवेक सिंह, कोषाध्यक्ष मनीष गुप्ता, जेल स्टाफ के वीरेंद्र तिवारी आदि शामिल हुए। संचालन नीर के अध्यक्ष विश्वास शर्मा और आभार प्रदर्शन दीपेंद्र शर्मा ने किया।