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स्कूलों में रस्सी कूदेंगे बच्चे

7 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता|नरसिंहगढ़

सभीशासकीय और निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को रस्सी कूद नियमित तौर पर करवाने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने संभागीय संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं। संचालनालय से 2 दिसंबर 2014 को बच्चों के बीच रस्सीकूद के खेल को लोकप्रिय बनाने, अन्य खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने और उनकी सेहत को बेहतर बनाए रखने के उद्देश्य से यह आदेश दिया गया है। स्थानीय अभिभावकों और खेलप्रेमियों ने इस पहल को बेहतर बताया है लेकिन साथ ही इसे असरदार तरीके से लागू करने की जरूरत भी बताई है। अभिभावकों के मुताबिक पहले भी शासन ने स्कूलों में खेल गतिविधियों को नियमित तौर पर संचालित किए जाने के लिए खेलों का एक पीरियड अनिवार्य रूप से लगाने का आदेश दिया था। इसपर ज्यादातर स्कूलों ने आज तक अमल नहीं किया है। उन्होंने आशंका जताई है कि विभाग की लापरवाही से कहीं यह आदेश भी कागज कार्रवाई तक ही सीमित हो जाए।

पहले भी दिया था आदेश

स्कूलोंमें रस्सी कूद को नियमित कराए जाने के संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय पहले भी 20 मार्च और 27 मार्च 2014 को आदेश जारी कर चुका है। इसके बावजूद स्कूलों ने इस बारे में अब तक कोई रिपोर्ट संचालनालय को नहीं भेजी है।

नरसिंहगढ़| रस्सीकूदना बच्चों का प्रिय खेल है। अब इसे स्कूलों में अनिवार्य तौर पर शुरू करने के लिए शासन ने स्कूलों को आदेश जारी कर दिए हैं।

योग का विकल्प है रस्सीकूद

^स्कूलोंमें बच्चों को रस्सीकूद से जोड़ना अच्छी पहल है। वास्तव में रस्सी कूद भारतीय योग-प्राणायाम का ही सरल विकल्प है। इससे वे सभी फायदे मिलते हैं जो योग के आसनों से मिल सकते हैं। बच्चों को इसी तरह की गतिविधियों से जोड़ना चाहिए। साथ ही स्थानीय स्तर पर शासन स्तर से भी खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है। खेल मैदान रखरखाव के अभाव में बेकार हो रहे हैं। उन्हें सुधारा जाना चाहिए और बेहतर प्रशिक्षकों से बच्चों को खेलों का प्रशिक्षण दिलवाना चाहिए। दीपेंद्रशर्मा, विक्रमविश्वविद्यालय के वॉलीबॉल के पूर्व वाइस कैप्टन।

होते हैं अनुशासित

^स्कूलोंमें खेल गतिविधियों को बढ़ावा मिलना जरूरी है। शासन ने रस्सी कूद को अनिवार्य करने का निर्णय लेकर सही कदम तो उठाया है, लेकिन इस आदेश को जमीनी स्तर पर लागू करना भी जरूरी है। अभी तक हो यह रहा है कि शिक्षा से