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ब्रह्मज्ञान और अमृतवाणी के बारे में बताया
कार्यालय संवाददाता| नरसिंहगढ़
श्रीसदगुरु आश्रम में चल रहे सदगुरु निर्वाण महोत्सव छठवें दिन बुधवार को आणंदी महाराष्ट्र के स्वामी हंसानंद पुरी महाराज ने संत ज्ञानेश्वर की ज्ञानेश्वरी पर प्रवचन दिए। उनके साथ इंदौर के रवींद्र बख्शी ने सतगुप्तानंद स्वामी के पद जब गुरु मिले ब्रह्मज्ञानी, तब बोले अमृतवाणी की व्याख्या की। शाम को तीसरे सत्र में यवतमाल के सुमननाथ महाराज ने कीर्तन किए। आयोजन में हैदराबाद से प्रभा लाटकर और यवतमाल से सुमन नाथ महाराज के नेतृत्व में 40-40 गुरुभक्त, देवगांव से स्वामी हंसानंद पुरी और उनकी शिष्या मां आनंद भारती सहित बडी़ तादाद में महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यों के गुरू भक्त शामिल हो रहे हैं। सभी गुरू भक्त दत्त संप्रदाय के वारकरी मत के तहत बलभीम महाराज परंपरा के अनुयायी हैं। महोत्सव का समापन 20 सितंबर को होगा।
नरसिंहगढ़ का आध्यात्मिक महत्व बताया
इंदौरके गुरुभक्त सुधाकर सिन्नरकर ने अपने प्रवचन में नरसिंहगढ़ का आध्यात्मिक महत्व बताया। उन्होंने कहा कि सदगुरु समर्थ बलभीम बाबा ने हम जैसे जिज्ञासुओं को अपनी शरण में लेकर मानव से नर बना दिया और आत्मज्ञान का उपदेश दिया। अब नर से नारायण होने के लिए चार पुरुषार्थों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की साधना करना ही सिंह का लक्षण है। वहीं पुरुषार्थ का अभ्यास और साधना करके आत्म रूपी सच्चिदानंद घन को प्राप्त करना ही गढ़ यानी किले को प्राप्त करना है। यही परम प्राप्ति नरसिंहगढ़ की प्राप्ति है।