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जंगल जंगल ढूंढ रहा मृग अपनी कस्तूरी को

5 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़

सरस काव्य गोष्ठी शनिवार रात को विवेकानंद स्कूल परिसर में रखी गई। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार विनोद कुमार रायसरा ने की। कार्यक्रम की शुरुआत नई कविता के वरिष्ठ कवि डॉ ओमप्रकाश साहू ने सरस्वती वंदना कोकिल कंठ शब्दमय हो स्वर से की।

युवा कवि पंकज शिवहरे कंवर ने अपनी रचना जंगल-जंगल ढूंढ रहा है मृग अपनी कस्तूरी को पेश कर सबकी तारीफें बटोरीं। व्यंग्यकार वल्लभ शर्मा ने अपनी अतुकांत कविता कवियों की शादी के जरिए कवि जीवन का वर्णन किया। नरेंद्र कुमार शुक्ला की चार आने की चाय पत्ती कविता में आज की स्थितियों पर करारा व्यंग्य किया गया। पर्यावरण कार्यकर्ता राजेश भारतीय ने पुकार रहा ये वसंत कविता से पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। शिवनारायण शर्मा ने मां शारदा को ही प्रकृति का दूसरा रूप बताते हुए वसंत पंचमी का महत्व बताया। राजेश व्यास ने ये कैसा संसार बनाया कविता के जरिए मानव मन के दुख को दर्शाया। शाहिद सैफी अश्क ने अपनी गजल उस हंसी के ख्वाब का इक दायरा होगा जरूर पेश की। वरिष्ठ कवि मनोहर मनु ने अपनी मार्मिक रचना दुख-दर्दों की रामायण है, उपदेशों की गीता है से अपनी संवेदनाएं बताईं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री रायसरा ने आशावाद में डूबी रचना दीप की आभा तिमिर को हर दे सुनाई। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों ने हिंदी के महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और उर्दू अदब के शायर निदा फाजली को याद किया। संचालन शाहिद सैफी ने किया।

प्रेरणा की काव्य गोष्ठी में छाया वासंती रंग
नरसिंहगढ़ | साहित्यिक संस्था प्रेरणा की काव्य गोष्ठी शनिवार को सोनी सदन में रखी गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वल्लभ किशोर शर्मा और सुठालिया के शायर अफजल खां खोखर थे। अध्यक्षता पंडित कृष्णगोपाल दीक्षित ने की। सरस्वती पूजा के बाद टीके शर्मा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। काव्यगोष्ठी में सभी कवियों ने वसंत ऋतु पर लिखी कविताएं सुनाईं। इनमें पंडित कृष्णगोपाल दीक्षित, मनोहर शर्मा मनु, डॉ ओमप्रकाश साहू, कैलाश सोनी डावर,इश्तियाक जैदी, अफजल खां खोखर, हाजी हैदर अली, ओपी गुप्ता अंबर, मोहन सिंह परमार अनंत, केपी भारतीय मानव, हरि सिंह परिहार पतंग, टीके शर्मा, संदीप साहू शामिल थे। आयोजन में राजमल पालीवाल, श्याम कुमार वर्मा, ओमप्रकाश गुप्ता, हरिओम शर्मा, छोटू सिंह, दिलीप कुमार, शशांक, संतोष आदि मौजूद थे। अंत में सभी ने सियाचिन के बहादुर जवान हनुमंथप्पा और दूसरे जवानों को मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। आभार प्रदर्शन मोहन सिंह परमार अनंत ने किया।

काव्य गोष्ठी
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