मनुष्य के अंदर भी है शक्ति
नसरुल्लागंज/छीपानेर | त्रेतायुग में रामभक्त हनुमान के अंदर राम रसायन की विद्या थी। यही शक्ति मनुष्य के अंदर होती है, लेकिन वह इस विद्या से अनभिज्ञ रहता है। यदि मनुष्य इस विद्या को प्राप्त करना चाहता है तो उसे निरन्तर राम-नाम का जाप करना होगा। इस विद्या को प्राप्त करने पर मनुष्य अनेक रुप धारण कर सकता है, जैसे रामभक्त हनुमान किया करते थे। यह बातें छीपानेर के दादाजी आश्रम में सात दिवसीय भागवत कथा के दौरान कथा वाचक पंडित धमेंद्र महाराज अग्निहोत्री ने श्रद्धालुओं से कहीं।
श्री अग्निहोत्री ने बताया कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण के पुत्र को जब राक्षसों द्वारा मारने का प्रयास किया गया तो उसे सागर में फेंक दिया गया। यह मछली के पेट में जा पहुंचा। जब केवट ने मछली को जाल में कैद किया तो मछली के चीरने के उपरांत उसमें बालक प्रदुम्र निकला। जिसका लालन पालन केवट की पुत्री जो पहले से कामदेव की प|ि रति के रुप में भानुमति अवतरित हो चुकी थी।