देवताओं के गुरु वृहस्पति होंगे अब वक्री
देवताओं के गुरु वृहस्पति होंगे अब वक्री
निज संवाददाता | नसरुल्लागंज
9दिसंबर मंगलवार से देवताओं के गुरु वृहस्पति वक्री हो जाएंगे। वर्तमान में गुरु कर्क राशि में उच्च के चल रहे हैं। गुरु को ज्योतिष में धर्म, अध्यात्म, ज्ञान, वैराग्य, शिक्षा, स्वर्ण, कर्मकांड, चावल आदि का कारक ग्रह माना जाता है।
ज्योतिषचार्य पंडित राजीव लोचन पांडे ने बताया कि गुरु की शुभ स्थिति में आने पर ही कन्याओं की कुंडलियों में विवाह के प्रबल योग बन जाते हैं क्योंकि गुरु ग्रह को स्त्री की कुंडली में पति का कारक माना गया है। गुरु के वक्री होने के प्रभाव से सोने की कीमतों में उतार चढ़ाव सकता है। इसलिए गुरु कुंडली में किस स्थान पर है, इसका विशेष महत्व है।
वर्तमान में शनि पर भी वृहस्पति की दृष्टि चल रही है जिसके कारण समाज में धार्मिक विवाद भी सामने सकते हैं। ज्योतिष में वक्री का अर्थ होता है पीछे चलना। ज्योतिष में सूर्य और चंद्र ही दो ग्रह हैं जो कभी वक्री नहीं होते। राहु और केतु कभी मार्गी नहीं होते। इस तरह की कई खास बातें हैं जो आसानी से समझ में नहीं आती हैं।