कटौती के बाद मौसम की मार से परेशानी
निज संवाददाता | नसरुल्लागंज
रबीसीजन में किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। बिजली कटौती और यूरिया खाद नहीं मिलने से सिंचाई में परेशानी रही है। मौसम भी साथ नहीं दे रहा है। ठंड नहीं पड़ने से फसलों की बढ़वार थम गई है। इन समस्याओं का असर फसल उत्पादन पर पड़ सकता है। इससे किसानों की चिंता बढ़ रही है।
किसान को अन्य परेशानियों के साथ मौसम के मिजाज ने रबी फसल को भी संकट में डाल दिया है। इसका मुख्य कारण दिसंबर के पहले हफ्ते में भी कड़ाके की ठंड नहीं पड़ना है। तीन सप्ताह से अधिक आयु पूर्ण कर चुकी गेहूं-चने की फसल को गर्म वातावरण ने नुकसान पहुंचता है। यदि ठंड की स्थिति यही रही तो आगामी दिनों में भी फसलों को नुकसान होगा। इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर भी पड़ेगा। किसानों ने बताया अक्टूबर में खरीफ फसल से निवृत्त होने के बाद नवंबर में खेतों में रबी की बोवनी कर दी फसलें अंकुरित होकर बड़ी हो गई। पहले यूरिया संकट और फिर बिजली कटौती के कारण सिंचाई नहीं कर पाए।
चनेपर इल्ली प्रकोप : चनाफसल पर इल्लियों का प्रकोप नजर आने लगा है। इल्ली चने के पत्ते चट कर रही है। इस कारण किसानों को बाजार से मंहगी कीटनाशक खरीदकर छिड़काव करना पड़ रहा है। कृषि विभाग के अनुसार ठंड अधिक पड़ती है तो इल्ली अपने आप ही खत्म हो जाएगी।
65हजार हेक्टेयर में निर्धारित है रकवा : ब्लाकमें इस साल 65 हजार हेक्टेयर में रबी फसल की बोवनी की गई है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इस बार शुरुआत से ही ठंड कमजोर है। पूरा नवंबर और दिसंबर माह के पहले हफ्ते तक ठंड नहीं पड़ने से नुकसान हो रहा है। फसल के लिए अभी ठंड फायदेमंद साबित होगी। यदि फसल में फूल आने के दौरान ठंड पड़ती है तो उससे नुकसान हो सकता है। बीते दो सालों से फसल में फूल आने पर ही कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे फसल को नुकसान हो रहा है। शीत लहर चलने से सबसे अधिक नुकसान चना फसल को होता है।