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अब मरीज लिखकर देंगे डॉक्टरों का रिपोर्ट कार्ड
रेवाशंकर शर्म | नसरुल्लागंज
सरकारीअस्पतालों में पदस्थ डॉक्टर अभी तक मरीजों को मेडिकल फिटनेस के सर्टिफिकेट देते आए हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की नई योजना के तहत अब मरीज उपचार कराने के बाद अनुभव के आधार पर इलाज करने वाले डॉक्टर को प्रमाण पत्र देंगे। सरकारी अस्पतालों में मरीजों के उपचार से खिलवाड़ करने वाले डॉक्टरों पर शिकंजा कसने के लिए स्वास्थ्य महकमे ने नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। उनके द्वारा किए जाने वाले इलाज से मरीज कितने संतुष्ट हैं, इस बात का प्रमाण पत्र लेना पड़ेगा।
इस बात की जानकारी के लिए अनेक बिदुंओं पर मरीजों का अभिमत लिया जाएगा। यह योजना इसी माह से प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में लागू हो रही है। शासन से आदेश जारी हो गए हैं। विभाग के नए फरमान सुनने के बाद लापरवाही करने वाले डॉक्टरों के कान भी खड़े हो गए हैं। इस आदेश के बाद अब मरीजों को अपने डॉक्टर का रिपोर्ट कार्ड पेश करने का लाइसेंस मिल जाएगा।
राउंडलेने वाले डॉक्टर भी दायरे में आएंगे
भर्तीमरीजों के लिए भी यह सुविधा भी रहेगी कि वे उस डॉक्टर के बारे में भी अपना अभिमत दे सकेंगे, जिसकी ड्यूटी राउंड लेने की रहेगी। वह किस मरीज को देखते हैं, किसी को बगैर देखे ही चले जाते हैं। मरीजों को किस तरह की परेशानी तो नहीं हुई। यदि डॉक्टर ने उनसे अच्छा व्यवहार नहीं किया तो अभिमत में लिख सकते हैं।
लेनाहोगा अभिमत पत्रक
स्वास्थ्यसंचालनालय भोपाल से हाल ही में यह फरमान जारी हुआ है कि प्रदेश के सभी सीएमएचओ और सिविल सर्जन अपने अधीनस्थ अस्पतालों में मरीजों से अभिमत पत्रक भरवाएं कि वे अपने डॉक्टर द्वारा किए गए इलाज से कितने संतुष्ट हैं। यदि मरीज उपचार से असंतुष्ट पाया गया तो डॉक्टर पर गाज गिर सकती है। अब आने वाले कुछ ही समय में ओपीडी में परामर्श देने वाले और मरीजों का उपचार करने वाले डॉक्टरों को मरीजों से गंभीरता से पेश आना होगा। अभी तक ये होता रहा है कि डॉ. मरीजों के साथ भेदभाव करते हुए उपचार में टालामटोली करते हैं। टालामटोली पूर्वक परीक्षण करते हैं।
बदल जाते हैं तेवर
स्वास्थ्यविभाग से लाखों का वेतन लेने वाले डॉक्टर सरकारी अस्पताल में अलग तेवर दिखाते हैं। आए दिन मरीजों के उपचार में लापरवाही करने की कई शिकायतें सामने आती हैं लेकिन यही मरीज जब प्राइवेट प्रेक्टिस करने वाले डॉक्टरों के क्लीनिक में मोटी फीस देकर इलाज कराते हैं तो यहां डॉक्टरों का रवैया बेहद नरम हो जाता है।
दिएहैं निर्देश
^संचालनालयसे आए नवीन निर्देश जिले के सभी अस्पतालों में भेज दिए गए हैं। इस व्यवस्था से डॉक्टरों की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और मरीज अपने अभिमत देंगे तो डॉक्टरों का रवैया मरीजों के प्रति जबावदेह रहेंगे। -आरकेगुप्ता, सीएमएचओ
अभिमत के प्रमुख बिंदु
मरीजोंके पंजीयन के लिए जो प्रक्रिया अपनाई जा रही है, वह सुविधाजनक है या नहीं। जो उपचार किया जा रहा है वह सही है या नहीं, किसी जांच के लिए बाहर का दबाव या सलाह तो नहीं दी जा रही। अस्पताल में भर्ती होने पर बिस्तर मिला या नहीं। अस्पताल की साफ सफाई व्यवस्था कैसी है। डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा अस्पताल में मिलने में कोई कठिनाई तो नहीं हुई। बाहर से दवाई लाने को तो नहीं कहा गया। अस्पताल में कोई पैसे की मांग तो नहीं की जाती। अस्पताल में दिया गया भोजन और नाश्ता ठीक था या नहीं। क्या डॉक्टर और नर्स का व्यवहार ठीक था।