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पेंशनरों को नहीं देना होगा जीवित होने का प्रमाण

7 वर्ष पहले
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{ शासन ने लागू की डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र की व्यवस्था

निजसंवाददाता | नसरुल्लागंज

अबपेंशनरों को पेंशन भुगतान के लिए जीवित होने का प्रमाणपत्र देने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा बायो-मीट्रिक ऑथेटिकेशन के आधार पर ऑनलाइन जीवन प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने की व्यवस्था लागू कर दी गई हैं। इससे पेंशनरों को हर वर्ष स्वयं उपस्थित होकर अपने जीवन होने का प्रमाण देने की जरूरत नहीं होगी।

पेंशन और परिवार पेंशनरों द्वारा बायो-मीट्रिक ऑथेटिकेशन तथा डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र वेबसाइट से संबंधित एप्लीकेशन एंड्रायड टेब, स्मार्ट फोन, विंडोज कंप्यूटर पर डाउनलोड की जा सकेगी। वे फिंगर प्रिंट स्केनर, आइरिस स्केनर प्राप्त कर एंड्रायड बेट, स्मार्ट फोन, विंडोज कंप्यूटर के यूएसबी पर प्लग इन कर स्वयं का आधार नंबर, बैंक खाता नंबर तथा मोबाइल फोन नंबर दर्ज कर स्वयं को पंजीकृत कर रियल टाइम में बायो-मीट्रिक ऑथेटिकेशन स्वयं कर सकेंगे।

मोबाइलपर मिलेगा मैसेज

पेंशनरवेबसाइट पर लोकेट सेंटर के माध्यम से अपने निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर या जिन बैंक शाखाओं में स्केनर की सुविधा हो वहां से भी बायो-मीट्रिक ऑथेटिकेशन कर सकेंगे। डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र जारी करने की कार्रवाई सफलता से हो जाने पर पेंशन को उनके द्वारा दिए गए मोबाइल पर एसएमएस द्वारा ट्रांजेक्शन आईडी प्राप्त होगी। इसके आधार पर वे कंप्यूटर जनेरेटेड जीवन प्रमाण-पत्र वेबसाइट से प्राप्त कर सकेंगे। यदि कोई पेंशनर पहले से ही पंजीकृत हैं, तो ऐसी स्थिति में आगामी वर्ष के नवंबर में डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र बायो-मीट्रिक ऑथेटिकेशन करने पर संबंधित बैंक के रिकार्ड में अपने-आप अपडेट हो जाएगा। नई व्यवस्था वर्तमान में प्रचलित व्यवस्था के अतिरिक्त होगी।