अंबड़, सीप सूखीं, बाकी की हालत भी खराब
निज संवाददाता | नसरुल्लागंज
चनाऔर गेहूं की फसल में लगातार सिंचाई से क्षेत्र की नदियां और बैराज सहित अन्य जल स्त्रोतों का जलस्तर घटता जा रहा है। क्षेत्र में अंबड़ सीप नदी जहां सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है वहीं कोलार नीलकंठ नदी में जलस्तर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। इन नदियों में सैकड़ों की संख्या में पंप और वॉटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से पानी खींच कर खेतों तक ले जाया जा रहा है। नदियों में पत्थर दिखाई देने लगे हैं।
क्षेत्र के दर्जनों गांवों में कई हैंडपंप ने पानी देना कम कर दिया है। पीएचई के सामने हैंडपंप में पाइप डालने की समस्या खड़ी हो गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में ग्रामीणों को पेयजल के लिए भी परेशान होना पड़ेगा। क्योंकि नदियों से चल रही सिंचाई पर प्रशासन लगाम लगाने की पहल नहीं कर पा रहा है। इस स्थिति में आशंका है कि आने वाले दिनों में जल स्तर और भी घट सकता है।
नदियोंके बीच में दिखाई देने लगे टापू
लगातारसिंचाई के कारण क्षेत्र की अंबड़ नदी की धार टूट चुकी है। नदी का पानी जगह-जगह कुंडो में सिमटा दिखाई दे रहा है। वहीं सीप नदी भी सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है। इसके अलावा बड़ी तादात में की जा रही पानी की चोरी के कारण क्षेत्र की कोलार नीलकंठ नर्मदा में भी जल स्तर धीरे-धीरे नीचे जाता जा रहा है। नीलकंठ में तो हालात यह बन गए है कि बीच-बीच में टापू दिखाई देने लगे है। सीप अंबड़ नदी में पत्थर दिखाई दे रहे है। क्षेत्र के पहाड़ी नाले पूरी तरह सूख चुके है। सोयाबीन की फसल का उत्पादन मंशा के अनुरूप ना होने से इस साल किसान गेहूं और चने की अच्छी फसल लेने के लिए खेतों की अब तक दूसरी बार सिंचाई शुरु कर चुके है।
पाइपोंका हो रहा उपयोग
फसलोंकी सिंचाई के लिए किसान पांच से लेकर 20 हार्सपॉवर के पंपों का उपयोग कर रहे हैं। एक-एक किमी दूर तक तीन से पांच इंच के पाइपों से पानी ले जाया जा रहा है। इसके चलते नदियां तेजी से खाली हो रही है।
बैराजोंने तोड़ा दम
इसवर्ष कम बारिश के चलते क्षेत्र का जलस्तर पहले ही नीचे था। ऐसे में जल संसाधन विभाग द्वारा भी बैराजों में बोरी बंधान गेट लगाने के बाद पानी का स्टोरेज किया था। लेकिन सोयाबीन की फसल का उत्पादन कम होने से किसानों ने बड़ी तादात में गेहूं की बुआई की थी।
जलस्तर घटा
सिंचाईके कारण जहां नदियों का जल स्तर घट चुका है, वहीं