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चुनाव के बाद मतों के आंकड़ों पर मंथन

7 वर्ष पहले
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निज संवाददाता | नसरुल्लागंज

पिछलेदिनों हुए नगरीय निकाय चुनाव भाजपा के लिए बहुत अच्छे साबित नहीं हुए। इन चुनावों से भाजपाईयों में मायूसी छा गई है। भाजपा का गढ़ कहलाने वाले कई वार्डों में प्रत्याशियों को मुंह की खाना पड़ी। ऐसे में निकाय चुनाव जीतने के लिए भाजपा के दिग्गजों को एड़ी से चोटी तक का जोर लगाना पड़ा। काफी जद्दोजहद के बाद भी भाजपा को अपनी तीसरी परिषद में केवल 390 मतों की जीत से ही संतोष करना पड़ा।

स्थानीय स्तर से केंद्र तक के नेतृत्व में भाजपा काबिज होने के बाद भी क्षेत्र में नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा की जीत बहुत ज्यादा मतों से नहीं हो सकी। ऐसे में भाजपा कार्यकर्ताओं में मायूसी छाई हुई है। इस चुनाव में दोनों ही मुख्य राजनैतिक दलों के अलावा निर्दलीय प्रत्याशियों को जनता का ज्यादा समर्थन मिला है। भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशी की जीत से भाजपा की छवि और धूमिल हुई है। यदि 2009-10 के नगरीय निकाय चुनाव की बात करे तो इस चुनाव में नगर के 8021 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इसमें भाजपा प्रत्याशी द्वारका प्रसाद अग्रवाल को 4458 तथा कांग्रेस के हरिसिंह वर्मा को 3075 मत प्राप्त हुए थे।

इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी 1383 मतो से जीते थे। लेकिन पिछले दिनों हुए नगरीय निकाय चुनाव में स्थिति बहुत ही चौकाने वाली सामने आई।

चुनाव में कुल 11 हजार 357 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इस चुनाव में भाजपा की अनिता लखेरा को 5 हजार 366 मत मिले, वहीं चुनाव मैदान में उतरी निर्दलीय प्रत्याशी रमा पटेल को 4 हजार 976 मत मिले। कांग्रेस की स्थिति तो बहुत ही खराब रही। ऐसे में भाजपा की जीत का अंतर सिर्फ 390 वोट रहा।

अपने ही गढ़ में हुए परास्त

पिछलेदिनों सामने आए चुनाव परिणामों पर नजर दौड़ाएं तो भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले वार्ड 7, 8 और 9 में भाजपा को पिछले चुनाव में 821 मतो की बढ़त प्राप्त हुई थी। लेकिन 2014 के चुनाव में इन्हीं वार्डों में यह बढ़त 50 फीसदी कम होकर 391 पर ही सिमट गई। इन परिणामों के बाद भाजपा खेमे में हड़कंप मचा हुआ हैं। अब देखना यह हैं कि भाजपा अपने आगामी पांच साल में कुछ ऐसा कर दिखाए, जिससे नगर के मतदाताओं का भरोसा पुन: भाजपा जीत सके।