सालों बाद भी नहीं समाधान
{अध्यक्ष पद के आरक्षण के लिए उत्सुक प्रत्याशी
{दस सालों की समस्याओं के साथ शुरू होगा चुनौती भरा सफर
निजसंवाददाता | नसरुल्लागंज
अक्टूबरमाह में नगर परिषद चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग की आदर्श आचरण संहिता प्रभावशील हो जाएगी।
नवीन परिषद के गठन के लिए अभी से ही जनप्रतिनिधियों ने वार्डों की ओर अपना रुख कर लिया है। पार्षद पद का आरक्षण तय होने के बाद अब मतदाताओं उम्मीदवारों की नजर अध्यक्ष पद के आरक्षण पर टिकी हुई है। नगर के वार्डों में भी पार्षद पद के उम्मीदवारों ने मिलना शुरु कर दिया है। इन प्रत्याशियों के सामने नगर की प्रमुख समस्याएं चुनौती बनकर सामने रही हैं।
तीन माह पूर्व नगर के 15 वार्डों का परिसीमन होने के बाद पार्षद पदों का आरक्षण होते ही अनेक उम्मीदवारों के अरमान ठंडे पड़ गए। वहीं आरक्षण के आधार पर नवीन दावेदारों ने वार्डों में अपनी पकड़ बनाना शुरु कर दिया है। वहीं अध्यक्ष पद के आरक्षण के लिए प्रत्याशी अब इंतजार कर रहे हैं।
सीएमका सपना भी नहीं हो सका पूरा
सीएमश्री चौहान का सपना था कि उनका यह क्षेत्र मध्यप्रदेश के नक्शे में अब्बल रहे। उन्होंने सांसद से लेकर मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए इस क्षेत्र को करोड़ों रुपए की सौगातें दीं, लेकिन बावजूद आज तक नगर की प्रबल समस्याओं का निदान नहीं हो सका।
इसी का परिणाम है कि नसरुल्लागंज शहर आज भी विकास के नक्शे में नहीं है। जो भी परिषद चुनकर आई उसने चुनाव के समय नगरवासियों से उक्त समस्याओं के निदान करने के लिए अनेक वायदे किए लेकिन परिषद का गठन होने के बाद यह सिर्फ वायदे बनकर ही रह गए।
एक नजर में नगर की प्रमुख समस्याएं
>नगर में बीचोंबीच से निकले नाले का नहीं हो सका चैनलीकरण।
> लोगों को नहीं मिल सका शहर में समय पास करने के लिए एक सुज्जजित पार्क।
> नगर के मुख्य बाजार में प्रतिदिन बनती जाम की स्थिति से नहीं मिली निजात।
> 10 करोड़ की नर्मदा नल-जल योजना का नहीं मिल सका लाभ।
> फोरलेन सड़क पर स्थापित डिवाईडरों का नहीं हो सका सौंदर्यीकरण।
> नगर के यात्री बस स्टैंड पर दस सालों में भी नहीं बन सका सुविधायुक्त यात्री प्रतीक्षालय।
> नगर के वार्डों में निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने नहीं बन सकी तकनीकि आधार पर नालियां।
> नगर के श्मशान मुक्ति धाम का नहीं हो सका सौंदर्यीकरण।
> मुख्यमंत्री के निर्देश