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ओवरलोड वाहनों के कारण सत्तर फीसदी सड़कों पर हो रहे हैं गड्‌ढे

5 वर्ष पहले
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प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री योजना के तहत बनाई गई हैं क्षेत्र में करोड़ों की लागत से सड़कें

भास्कर संवाददाता | नसरुल्लागंज

क्षेत्रवासियों को सुविधा प्रदान करने के लिए प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने अरबों रुपए स्वीकृत कर तहसील क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाया दिया है। इन सड़कों का उपयोग राहगीरों ने कम और रेत माफियाओं ने ज्यादा किया। आलम यह है कि समय से पहले ही क्षेत्र की 70 फीसदी सड़कें रेत के ओवर लोड के कारण गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। सड़कों की बदहाली स्थिति की ओर जिम्मेदार भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने लोगों को सड़कों की सौगात देने लोनिवि को क्षेत्र में सड़क बनाने के आदेश दिए थे। इसी के तहत मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत 350 करोड़ रुपए, प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत 450 करोड़ रुपए, मंडी बोर्ड के तहत 700 करोड़ रुपए, वहीं मप्र सड़क विकास निगम के तहत 2 अरब 40 करोड़ रुपए की सड़कें वर्ष 2014 तक तैयार की गई थीं। इसमें से 70 फीसदी सड़कों ने रेत के ओवर लोडिंग परिवहन से समय से पूर्व ही दम तोड़ दिया है।

ओवरलोड परिवहन के साथ भ्रष्टाचार भी उजागर
भाजपा शासनकाल में सड़कें बदहाल होने के कारण ओवर लोड परिवहन के साथ एक बड़ा कारण भाजपा से जुड़े ठेकेदारों ने जो सड़कें बनाई हैं। वे भ्रष्टाचार को उजागर को उजागर कर रही हैं। कैलाश परमार, जिलाध्यक्ष कांग्रेस

अब मापदंड के अनुसार ही बनेगी सड़क
क्षेत्र में ओवर लोड परिवहन को देखते हुए ही सड़कों का निर्माण कार्य किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद भी अवैध रूप से किए जा रहे परिवहन को देखते हुए विभाग से सख्ती बरतने को कहा गया है। डाॅ. सुदाम खाड़े कलेक्टर

समय पर कार्रवाई न होने से बने हालात
पीडब्ल्यूडी एसडीओ डीके श्रीवास्तव ने कहा कि यदि समय पर ही अवैध परिवहन पर रोक लगाई गई होती तो यह हालात नहीं बनते।

तहसील से जिले तक अधिकारी मौन
जब बात प्रदेश से शुरू हो तो तहसील से लेकर जिले तक के अधिकारी मौन हो जाते हैं। क्षेत्र में भी कुछ ऐसे ही हालात नजर आ रहे हैं। क्षेत्र की बदहाल सड़कों के लिए एनजीटी की रोक तो जिम्मेदार है ही, लेकिन प्रशासन में बैठे जिम्मेदार अधिकारी भी बदहाल सड़कों का कारण बने हुए हैं। क्षेत्र में नर्मदा तटीय घाटों से प्रतिबंध के दौरान उत्खनन व परिवहन की शिकायत जवाबदारों तक पहुंचने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है। नतीजा यह निकला कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार क्षेत्र में बिछाई गई सड़केंं समय से पूर्व ही बदहाल हो चुकी हैं।

एनजीटी की रोक से गांवों के रास्ते निकले ट्रक
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जून 2015 में पर्यावरण संतुलन बिगाड़ने वाले हर कार्य पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसमें विशेष रूप से नर्मदा तटीय घाटों, शासकीय व निजी भूखंडों से उत्खनन पर रोक लगाई गई थी। इसका परिणाम यह सामने आया कि क्षेत्र में रेत माफियाओं ने प्रशासन के नुमाइंदों से सांठगांठ कर बड़ी तादात में रेत का न केवल उत्खनन किया, बल्कि ओवर लोडिंग वाहनों से परिवहन कर सड़कों को असमय ही बदहाल कर दिया।

इस पर अधिकारियों से चर्चा की जाएगी
बदहाल सड़कों को लेकर अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। प्रतिबंध तो लगाया गया हैं, लेकिन चोरी छिपे परिवहन किया जा रहा है। इसे रोकने का प्रयास किया जाएगा। रघुनाथ सिंह भाटी, जिलाध्यक्ष भाजपा

क्षेत्र के गांव छिदगांव से डिमावर की सड़क का समाप्त हुआ अस्तित्व।

सड़कें खराब होने से आवागमन हो रहा है प्रभावित
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