मौसम परिवर्तन से गेहूं की फसल रोग की चपेट में
गेहूं में लगा हेड व्हाइट रोग, समय से पहले सूखने लगी फसलें
भास्कर संवाददाता | नसरुल्लागंज
क्षेत्र में अधिकतर गेहूं की फसल ऊपर से सूखने लगी है और नीचे का डंठल हरा रह गया। इस कारण क्षेत्र के किसान खासे परेशान नजर आ रहे हैं, जबकि कृषि अधिकारियों की मानें तो फसल में मौसम परिवर्तन के कारण हेड व्हाइट रोग लग रहा है। इसके चलतेे फसल का ऊपर का हिस्सा सूख रहा है और नीचे का हिस्सा हरा है।
हालांकि किसान अपनी फसल बचाने के लिए दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं। मालूम हो कि क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। वहीं टेल क्षेत्र के किसानों को नहरों से पानी नहीं मिलने से भी फसल सूख चुकी है। कई किसानों ने डबल बोवनी भी की है। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष ठंड भी अधिक नहीं पड़ी है। तापमान में गर्मी बनी रहने से गेहूं की पर्याप्त वृद्धि नहीं हो सकी है। इसका असर भी उत्पादन पर दिखाई देगा। इन सभी समस्याओं से जूझ रहे किसानों को अब हेड व्हाइट नाम की बीमारी ने घेर लिया है। इससे किसानों की परेशानियां और अधिक बढ़ गई हैं।
चमेटी, बोरखेड़ी, रूजनखेड़ी, तिलाड़िया, झागर, अतरालिया, मंडी सहित अनेक गांवों में फसलों में बीमारी के हल्के लक्षण नजर आने लगे हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार कृषकों को सामूहिक तौर पर दवाओं का छिड़काव करना होगा।
दवा का छिड़काव कर बचा रहे फसल
मौसम परिवर्तन के कारण क्षेत्र के अधिकतर हिस्सों में इस बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। जहां बीमारी देखी जा रही है, वहां के किसान दवाओं का छिड़काव करने में जुटे हुए हैं। यदि समय रहते इस बीमारी का निदान नहीं किया तो यह बीमारी धीरे-धीरे फसलों पर बढ़ने लगेगी।
पारा बढ़ने से लगा रोग
सर्दी के मौसम में तापमान नहीं घटने से रबी फसलों की बढ़वार नहीं रुक रही है। तापमान ज्यादा होने के कारण गेहूं के पौधे मुरझा रहे हैं। पत्ते पीले पड़ने लगे हैं। ऐसे में फसलों में रोग लगने की आशंका और बढ़ गई है। इससे किसान चिंतित हैं।
जरूरी है तापमान का तालमेल
वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी लक्ष्मीनारायण विश्वकर्मा ने बताया कि रबी फसलों की अच्छी पैदावार के लिए अधिकतम तापमान 20 डिग्री व न्यूनतम तापमान 8 डिग्री होना चाहिए, जबकि एक सप्ताह के तापमान पर नजर डालें तो क्षेत्र का अधिकतम तापमान 28 से 31 डिग्री व न्यूनतम 14 से 20 डिग्री के आसपास चल रहा है। मौसम परिवर्तन के कारण गेहूं में हेड व्हाइट नामक बीमारी की बात सुनी गई है। हालांकि क्षेत्र में कुछ ही गांवों में इसके सूक्ष्म लक्षण दिखाई दिए हैं। इसे दवा का छिड़काव कर दूर किया जा सकता है।