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धन के साथ धर्म का संचय भी जरूरी : चौबे

6 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | नसरुल्लागंज

संसार में प्रत्येक मनुष्य को शरीर के साथ आत्म सुख शांति पाने का प्रयास करना चाहिए। धन दो प्रकार के होते हैं। एक भौतिक धन इसमें सोना, चांदी, जमीन, जायदाद इससे परिवार को सुख मिलता है। दूसरा आध्यात्मिक धन है इसमें दया, धर्म, धैर्य, प्रसन्नता, निर्भयता, परोपकार, सत्य को पाकर आत्मा को सुख शांति मिलती है। इसलिए हमारे ऋषि मुनि साधु संत ने भौतिक धन से ज्यादा श्रेष्ठ आध्यात्मिक धन को महत्व दिया है। यह बात गांव श्यामपुर में चल रही भागवत कथा के समापन अवसर पर पंडित अशोक चौबे ने कही।

पं. चौबे ने बताया कि वैज्ञानिक युग में भौतिक सुख सुविधाओं के सभी प्रकार के साधन मनुष्य को प्राप्त हो रहे हैं, लेकिन मनुष्य इस भौतिक जीवन में आध्यात्मिक साधना को भूल बैठा है। जब तक ध्यानोपासना, ज्ञान, त्याग, सुमिरन को महत्व नहीं दिया जा रहा है।

इससे मनुष्य अनेक प्रकार की समस्याओं में उलझ चुका है। पूंजीपति योग ध्यान वैभव होने पर भी दुखी, रोगी व अशांत रहते हैं। भौतिक धन के साथ हमारे वैद्य, शास्त्र, उपनिषद में जो लिखा है उसका एक ही उद्देश्य है कि प्रत्येक मानव चाहे वह किसी भी वर्ग को हो, जीवन के सुख साथ-साथ मोक्ष तक पहुंचेगा। वर्तमान समय में मोक्ष प्राप्ति के लिए शुद्ध, सात्विक धर्म के आयोजक की जरूरत है। समापन के साथ यहां पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें 5000 से अधिक श्रद्धालुओं को भोज कराया गया।

श्यामपुर में श्रीमद् भागवत के समापन अवसर पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जन समूह।